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Egg Hatching Facility: पश्चिम चम्पारण जिले के मुर्गी पालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब अंडों से चूजे निकलवाने के लिए उन्हें दूसरे जिलों का रुख नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि Krishi Vigyan Kendra Madhopur में इंक्यूबेटर और हैचिंग की आधुनिक सुविधा शुरू कर दी गई है. यहां वैज्ञानिक पद्धति से 21 दिनों में अंडों से चूजे तैयार किए जा रहे हैं, जिससे कड़कनाथ, वनराज, सोनाली, बत्तख और बटेर पालकों को सीधा लाभ मिलेगा. मामूली शुल्क में उपलब्ध इस सुविधा से एक बार में करीब 1000 अंडों की हैचिंग संभव है, जो जिले के पोल्ट्री फार्मर्स के लिए बड़ी सहूलियत साबित हो रही है. रिपोर्ट- आशीष कुमार
पश्चिम चम्पारण जिले के वैसे सभी मुर्गी पालक जिन्हें अंडे से चूजा निकालने के लिए बाहर का रुख करना पड़ता था. अब घर बैठे अपने जिले से ही इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं.
मझौलिया प्रखंड के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में अंडे से चूजा निकालने की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है. वो चाहे कड़कनाथ हो या ब्रायलर, बत्तख हो या बटेर, अब किसी भी पक्षी के चूजे के लिए फॉर्मर्स को बाहर का रुख नहीं करना पड़ेगा.
माधोपुर कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ.जगपाल बताते हैं कि, इनक्यूबेटर और हैचिंग के जरिए वैज्ञानिक पद्धति से अंडों से चूजों को निकालने और संवर्धित करने का काम शुरू किया गया है. जिले में बड़ी संख्या में पोल्टी फार्मर्स हैं जो मुर्गी, बत्तख, बटेर इत्यादि के अंडों को लेकर केंद्र आ रहे हैं.
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यहां 21 दिनों तक अंडों को इंक्यूबेटर्स में रखा जाता है. जिसके बाद उनसे चूजे निकल आते हैं. फार्मर्स जो अंडे लेकर आते हैं उन्हें नंबरिंग देकर मशीन में रख दिया जाता है. अंडों में चूजों का विकास हो रहा है या नहीं, इसे देखने के लिए समय समय पर वैज्ञानिक इसकी जांच भी करते हैं. ठीक तीन सप्ताह ( 21 दिन) में अंडों से चूजे निकल आते हैं.
बताते चलें कि केवीके में वनराज, कड़कनाथ, सोनाली और देसी नस्ल के मुर्गे मुर्गियों का पालन किया जा रहा है. ऐसे में जिले के ज्यादातर पोल्टीफार्मर्स भी ब्रॉयलर छोड़ इन खास नस्ल के मुर्गे मुर्गियों की फार्मिंग करने लगे है. इनसे मिलने वाले अंडों को वो केंद्र लेकर आते हैं. यहां 300 की क्षमता वाले कुल तीन इंक्यूबेटर्स लगाए गए हैं, जिससे एक बार में करीब 1000 अंडों को हैच किया जा सकता है.
केंद्र में पोल्ट्रीफार्म का मुख्य उद्देश्य हैचिंग के जरिए चूजे विकसित करना है, जिसे पशुपालन विभाग द्वारा बैकयार्ड योजना के तहत हितग्राहियों को उपलब्ध कराया जाता है. प्राकृतिक तरीके से जब मुर्गियां अंडों को हैच करती हैं, तब उस दौरान एक बार में 10 से 12 अंडे ही हैच कर पाती हैं. गौर करने वाली बात यह है कि इस दौरान वो बेहद कमजोर भी हो जाती हैं.
ऐसे में इस समस्या के समाधान के लिए इंक्यूबेटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. जिले का कोई भी पोल्टी फार्मर एक नॉमिनल चार्ज देकर इस सुविधा का लाभ ले सकता है और सिर्फ 21 दिनों में ही 1000 चूजों को ले सकता है.
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