प्लाटून कमांडर को सब-इंस्पेक्टर पद पर नियुक्ति का मामला: एडीजीपी को नोटिस, कोर्ट ने कहा- आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों ना की जाए – Gwalior News


ग्वालियर हाईकोर्ट ने प्लाटून कमांडर को सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति देने के मामले में असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ADGP) पुलिस मुख्यालय भोपाल के पद पर कार्यरत गोपाल सिंह धाकड़ को नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी कर कोर्ट ने पूछा, क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए? मामला वर्तमान में प्लाटून कमांडर के पद पर कार्यरत पीयूष शर्मा से जुड़ा हुआ है। 15 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए एसआई के पद पर नियुक्ति देने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ ना तो अपील की गई, ना ही पीयूष शर्मा को नियुक्ति प्रदान की गई। इसके चलते अब पीयूष ने फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिस पर उक्त आदेश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई अब 17 मार्च को होगी। यह है पूरा मामला याचिकाकर्ता पीयूष शर्मा की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट अभिनव भार्गव ने कोर्ट को बताया साल 2010 में पुलिस थाना बहोड़ापुर में पीयूष के खिलाफ मारपीट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ। जिसमें वह 20 अगस्त 2013 को बरी हो गया। इसके बाद उसने परीक्षा में भाग लिया। 13 नवंबर 2017 को याचिकाकर्ता प्लाटून कमांडर बन गया। इसके बाद याची ने एक और परीक्षा दी और उसमें भी पास हुआ। 31 जनवरी 2018 को जारी परीक्षा परिणाम में याचिकाकर्ता को एसआई के पद की पोस्ट मिली। लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी जब नियुक्ति पत्र नहीं मिला तो 2021 में याचिका दायर की गई। शासन ने इस केस में आपराधिक प्रकरण का हवाला देते हुए याची को अनुपयुक्त बताया। इस याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 को याची के पक्ष में फैसला दिया। अधिकारी के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था इस मामले में एडीजीपी धाकड़ ने 19 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी किया, जिसमें याचिकाकर्ता को एसआई पद के लिए उपयुक्त नहीं बताया था। कोर्ट ने इस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है और कहा कि सिंगल बेंच के आदेश को कहीं भी चुनौती नहीं दी गई थी, तो संबंधित अधिकारी के पास नियुक्ति पत्र जारी करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि एडीजीपी गोपाल सिंह धाकड़ का यह नया आदेश कोर्ट की अवमानना है। अब इस मामले में 17 मार्च को फिर से सुनवाई होनी है। एडीजीपी को कोर्ट के नोटिस का जवाब देना है। .

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