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Tips Tricks: अगर आप अपने घर की खाली जमीन या छत को उपयोगी बनाना चाहते हैं, तो मसाला वाटिका यानी किचन गार्डेनिंग एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. बेहद कम खर्च और थोड़ी सी देखभाल के साथ आप सौंफ, धनिया, मेथी, अदरक और अजवाइन जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले मसालों को घर पर ही उगा सकते हैं. सही मिट्टी, वर्मी कंपोस्ट और उचित धूप का ध्यान रखकर 250 वर्ग मीटर या गमलों में भी आसानी से मसालों की बागवानी की जा सकती है. इससे न सिर्फ आपको ताजे और ऑर्गेनिक मसाले मिलेंगे, बल्कि चाहें तो इसे छोटे स्तर पर आय के स्रोत में भी बदला जा सकता है. रिपोर्ट- आशीष कुमार
यदि आप भी अपने घर या उसके आस पास की खाली जमीन को मसालों की बगिया में तब्दील करना चाहते हैं, तो इस लेख में हम आपको किचन गार्डेनिंग की कुछ ऐसी कारगर विधि बता रहे हैं, जिससे बेहद कम खर्च में दर्जनों मसालों की वाटिका तैयार की जा सकती है.
मजे की बात यह है कि इस वाटिका से आप हर दिन ताजे और ऑर्गेनिक मसालों को अपने उपयोग में ला सकते हैं, साथ ही घरेलू स्तर पर व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं.
मसाला वाटिका को तैयार करने की जानकारी देते हुए जिले के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.अभिषेक प्रताप सिंह बताते हैं कि इसकी शुरुआत महज 250 वर्ग मीटर पैमाने की मीन से की जा सकती है. इतनी जमीन पर आप पांच से छह प्रकार के मसालों की बागवानी बड़ी आसानी से कर सकते हैं.
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इतना ही नहीं, मसाला वाटिका को आप घर की छत पर रखे गमलों में भी तैयार कर सकते हैं. बस ध्यान रहे कि किचन गार्डेनिंग के तहत सिर्फ वैसे ही मसालों की खेती संभव है, जिसे बीज से रोपा जा सकता है.
विस्तार से बताएं तो सौंप, अजवाइन, मेथी, अदरक और धनिया जैसे मसालों को घर के आस पास खाली पड़ी जमीन या गमले में रोपा जा सकता है. इसे रोपने के लिए मिट्टी का प्रकार, सही तापमान और उचित नमी जैसी चीजों का खास ध्यान रखना होगा. बकौल डॉ.अभिषेक, मसालों की गार्डनिंग के लिए बलुई दोमट मिट्टी को उत्तम माना जाता है. मिट्टी में ऑर्गेनिक मैटर की अधिकता फसल के विकास में अहम है, इसलिए वर्मी कंपोस्ट का उपयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए. हां, मिट्टी के चुनाव के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वो उर्वरक और उपजाऊ हो.
यदि आप मसालों को गमले में रोपाते हैं, तो इस बात का खास ध्यान रखें कि गमले को अधिक छांव वाली जगह पर न रखा जाए. साथ ही गमले का आकार बड़ा हो और उसकी गहराई अधिक हो. मछली का कैरेट, स्टील या लोहे की ड्रम या प्लास्टिक के बोरे में भी मसालों की बुवाई की जा सकती है.
यदि आप मसालों की बुवाई खाली पड़ी जमीन पर करते हैं, तो ध्यान रखें कि वहां जलजमाव की स्थिति न रहती हो. साथ ही मिट्टी उपजाऊ हो. चुकी बुवाई के बाद इन फसलों को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है और न ही इन पौधों पर कीटों का प्रकोप रहता है, इसलिए आपको बिना परेशान हुए मसालों के सेवन का मौका आसानी से मिल सकता है.
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