फाल्गुन पूर्णिमा और होलिका दहन आज: बाल गोपाल और हिंडोला दर्शन करने की परंपरा, आज दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान

4 घंटे पहले

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आज (2 मार्च) होलिका दहन किया जाएगा। इस साल धुलंडी यानी होली खेलने की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं, क्योंकि कल यानी 3 मार्च को चंद्रग्रहण होगा। दिनभर चंद्रग्रहण का सूतक होने से अधिकतर पंडित 3 तारीख की जगह 4 तारीख को होली खेलने की सलाह दे रहे हैं, वहीं कुछ पंडितों का कहना है कि 3 तारीख को भी होली खेली जा सकती है।

होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा तिथि से जुड़ी कई परंपराएं हैं। इस दिन होलिका की पूजा के साथ ही भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और देवी लक्ष्मी का अभिषेक भी किया जाता है। शिवलिंग का रुद्राभिषेक करते हैं, दान-पुण्य करने की और नदी स्नान करने की भी परंपरा है। इन शुभ कामों के साथ ही फाल्गुन पूर्णिमा पर बाल गोपाल और हिंडोला (झूला) दर्शन करने का भी विशेष महत्व है। जानिए हिंडोला कैसा बना सकते हैं और इसके लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शास्त्रों में बाल गोपाल और हिंडोला दर्शन का महत्व काफी अधिक बताया गया है। माना जाता है कि जो लोग फाल्गुन पूर्णिमा पर हिंडोला दर्शन करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं भगवान पूरी करते हैं। शास्त्रों में लिखा है कि-

फाल्गुनस्य तु राकायां मण्डयेद्दोलमण्डपम्।

पश्चातसिंहासनं पुष्पैर्नूतनैर्वस्त्रचित्रकै:।।

अर्थ – फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की रात सुंदर फूलों से सजे हुए झूले पर नए वस्त्र पहने हुए भगवान बाल गोपाल को विराजमान किया जाता है। इसके बाद पूजा-पाठ के साथ उत्सव मनाया जाता है। इसे ही हिंडोला दर्शन कहते हैं।

ऐसे बना सकते हैं हिंडोला

हिंडोला बनाने के लिए एक छोटा सा झूला बनाएं या बाल गोपाल के लिए झूला बाजार से खरीदकर भी ला सकते हैं। झूले को सुंदर फूलों से सजाएं।

बाल गोपाल को विराजित करने के लिए झूले में आसन बनाएं।

भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करके नए लाल-पीले चमकीले वस्त्र पहनाएं। इसके बाद भगवान की मूर्ति झूले में बने आसन पर विराजित करें।

धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। भगवान को फूल अर्पित करें।

इस तरह पूजा करने के बाद होली उत्सव मनाएं। एक-दूसरे पर फूल और गुलाल उड़ाएं।

फाल्गुन पूर्णिमा पर करें पितरों के लिए श्राद्ध कर्म

फाल्गुन पूर्णिमा पर पितरों के लिए श्राद्ध कर्म भी करना चाहिए। माना जाता है कि इस तिथि पर किए गए श्राद्ध, तर्पण, धूप-ध्यान से घर-परिवार के पितर देवता बहुत प्रसन्न होते हैं। पितर देवता घर-परिवार के मृत सदस्यों को कहा जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान भी करना चाहिए। धूप-ध्यान के लिए दोपहर में करीब 12 बजे गाय के गोबर से बना कंडा जलाएं। जब कंडे से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब कंडे के अंगारों पर गुड़-घी डालें और पितरों का ध्यान करें। हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें। ये धूप-ध्यान करने से सरल विधि है।

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