तेल की बढ़ती कीमतों से भारत को कितना नुकसान? क्या सप्लाई में रूकावट की भी है संभावना?

Oil Prices Surge Impact: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के लगातार घातक हमले से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रूकावट की आशंक बढ़ रही है. इसके चलते एशियाई बाजार के खुलते ही तेल की कीमतों में 10 परसेंट तक का उछाल आया.

ब्रेंट क्रूड और निमेक्स लाइट स्वीट क्रूड दोनों की कीमतें सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी से बढ़ीं. एक समय में ब्रेंट 12 परसेंट से ज़्यादा बढ़कर लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर पहुंच गया, जो शुक्रवार को बंद भाव 73 डॉलर से कुछ ज्यादा है. इसी तरह से अमेरिकी क्रूड लगभग 8 डॉलर या 12 परसेंट बढ़कर लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगभग 8 परसेंट बढ़कर 72 डॉलर पर आ गया. इन सबके बीच अब बड़ा सवाल यह आता है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें बढ़ने का भारत पर क्या असर होगा? आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं. 

भारत को नहीं घबराने की जरूरत

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव के बावजूद भारत के लिए अभी तुंरत तेल की सप्लाई में रूकावट आने की कोई उम्मीद नहीं है. भारत को फिलहाल घबराने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि भारतीय रिफाइनर कंपनियों के पास अभी कम से कम 10 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल का काफी स्टॉक है. इनके पास 5-7 दिनों का फ्यूल स्टॉक भी है. ऐसे में अगर थोड़े समय के लिए सप्लाई रूकती भी है तो काम चलाया जा सकता है.

साथ ही इमरजेंसी की स्थिति में भारत के पास प्लान-बी भी है. इसके तहत, भारत अमेरिका से लेकर वेस्ट अफ्रीका, रूस, लैटिन अमेरिका जैसे दुनिया के अलग-अलग देशों से तेल की सप्लाई बढ़ा सकता है. यानी कि भारत अब तेल के लिए सिर्फ मिडिल ईस्ट पर निर्भर नहीं है, बल्कि दूसरे देशों के साथ बढ़ते व्यापारिक साझेदारी के साथ भारत की उर्जा सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है.

एक्सपर्ट्स का कहना है, “अमेरिका के दबाव में आकर भारत ने रूस से तेल की खरीद में कटौती की थी, लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में कोई दिक्कत होती है तो वापस हम रूस का रूख कर सकते हैं. सवाल सिर्फ ट्रांजिट टाइम का है. मिडिल ईस्ट से एक जहाज को भारत आने में 5 दिन लगते हैं, जबकि रूस से आने में कम से कम एक महीने का समय लगता है इसलिए समय पर ऑर्डर देने का सवाल है.” इसके अलावा, जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि भारत के पास स्ट्रेटेजिक रिजर्व का इस्तेमाल करने का भी ऑप्शन है, जिसमें एक हफ्ते की जरूरत को पूरा करने के लिए इन्वेंट्री होती है. 

भारत का विदेशी मुद्रा भ्रंडार

भारत के पास अभी लगभग 720-730 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है. ऐसे में तेल की कीमत में अचानक उछाल या रुपये में अस्थिरता को संभालने की यह ताकत रखता है. देश का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार उसके लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है. बेशक तेल की बढ़ती कीमतें चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भारत की आर्थिक नींव इतनी मजबूत है कि उसमें ऐसे किसी नुकसान से निकलने की क्षमता है.

फरवरी 2026 में 1.83 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन इसी बात का सबूत है, जिससे पता चलता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही हैं, घरेलू मांग अधिक है. इससे वैश्विक झटकों से निपटा जा सकता है.

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