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Soda Startup Success Story: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव के युवा उद्यमी अमोल भावसार ने सरकारी योजना की मदद से जिंगो सोडा ब्रांड खड़ा कर सालाना 30 लाख रुपए का कारोबार शुरू किया है. कभी नौकरी के लिए भटकने वाले अमोल आज 17 लोगों को रोजगार दे रहे हैं और छोटे शहर से बड़ा बिजनेस खड़ा करने की मिसाल बने हैं. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत मिले लोन और सब्सिडी ने उनके सपनों को उड़ान दी. जिंगो सोडा आज निमाड़ क्षेत्र में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और लोकल ब्रांड के रूप में पहचान बना चुका है. यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कम संसाधनों में भी बड़ा मुकाम हासिल करना चाहते हैं.
Startup Success Story: अक्सर हम सुनते हैं कि स्टार्टअप और बड़ा बिजनेस सिर्फ बड़े शहरों में ही पनपते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव के 32 वर्षीय अमोल भावसार ने ये सोच बदल दी. कभी नौकरी की तलाश में दर-दर भटकने वाले अमोल आज अपने दम पर सालाना करीब 30 लाख रुपए का कारोबार कर रहे हैं. उनकी कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी को अपनी मजबूरी मान लेते हैं.
नौकरी नहीं मिली तो खुद बन गए मालिक
अमोल बताते हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन किया, लेकिन मनचाही नौकरी नहीं मिली. समय बीतता गया और निराशा बढ़ने लगी. तभी उनके मन में ख्याल आया कि क्यों न खुद का कुछ शुरू किया जाए. लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत थी पैसे की. तभी उन्हें मध्य प्रदेश सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने आवेदन किया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जरिए 25 लाख रुपए का लोन स्वीकृत हुआ. इसमें 7.5 लाख रुपए की सब्सिडी भी मिली. यही उनके सपने की पहली सीढ़ी बनी.
‘जिंगो सोडा’ बना लोकल से ब्रांड
सरकारी योजना का फायदा उठाकर अमोल ने जेएंडबी बेवरेज नाम से यूनिट शुरू की और ‘जिंगो सोडा’ ब्रांड लॉन्च किया. बाजार की मांग समझकर उन्होंने तीन फ्लेवर उतारे जीरा, बूम और स्पीड. शुरुआत में उन्होंने लोकल मार्केट पर फोकस किया. धीरे-धीरे निमाड़ क्षेत्र में उनकी सप्लाई मजबूत हो गई. आज जिंगो सोडा किराना दुकानों से लेकर छोटे व्यापारियों तक पहुंच चुका है. लोकल ब्रांड होने की वजह से लोगों का भरोसा भी तेजी से बढ़ा है.
मशीनों से तैयार, क्वालिटी में दम
उनकी फैक्ट्री में सोडा बनाने की पूरी प्रक्रिया मशीनों से होती है. बोतल बनना, लेबल लगना और पैकिंग तक सब कुछ व्यवस्थित तरीके से होता है. इससे प्रोडक्ट की क्वालिटी बनी रहती है और बाजार में भरोसा भी.
खुद आगे बढ़े, 17 लोगों को दिया रोजगार
अमोल का ये स्टार्टअप सिर्फ उनका सपना नहीं, बल्कि 17 परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया बन चुका है. छोटे शहर में इस तरह की यूनिट लगाना बड़ी बात है. आज उनकी सालाना टर्नओवर करीब 30 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है. आगे उनका प्लान नए फ्लेवर लॉन्च करने और जिले से बाहर ब्रांड को ले जाने का है.
युवाओं के लिए सुनहरा मौका
सरकार की इस योजना में 35 प्रतिशत तक अनुदान और ब्याज में छूट मिलती है. जिले के किसान और युवा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क कर इसका लाभ ले सकते हैं. सही जानकारी और हिम्मत हो तो छोटे शहर से भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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