रात को सोते समय पैरों में होती है झनझनाहट? इसे नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

Last Updated:

रात को जैसे ही आप बिस्तर पर लेटते हैं, क्या पैरों में अजीब सी झनझनाहट, जलन या बेचैनी शुरू हो जाती है. पैर हिलाने से कुछ देर राहत मिलती है, लेकिन रुकते ही परेशानी फिर लौट आती है. अक्सर लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह आदत एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकती है.

Zoom

रात का समय शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए होता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यही वक्त सबसे ज्यादा बेचैनी भरा साबित होता है. जैसे ही वे बिस्तर पर लेटते हैं, पैरों में झनझनाहट, हल्की जलन या खिंचाव महसूस होने लगता है. पैर हिलाने से थोड़ी देर सुकून मिलता है, लेकिन रुकते ही दिक्कत फिर लौट आती है. कई लोग इसे साधारण थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यह रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम का संकेत हो सकता है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक, रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम का संबंध दिमाग और तंत्रिकाओं से जुड़ा है. हमारे मस्तिष्क में डोपामिन नाम का रसायन मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है. जब डोपामिन का संतुलन बिगड़ जाता है, तो शरीर की हरकतों पर असर पड़ता है और पैरों को बार-बार हिलाने की इच्छा होती है. कुछ विशेषज्ञ इसे पार्किंसंस रोग से भी जोड़कर देखते हैं, क्योंकि उस स्थिति में भी डोपामिन की कमी पाई जाती है. हालांकि दोनों बीमारियां अलग हैं, लेकिन रासायनिक असंतुलन दोनों में महत्वपूर्ण माना जाता है.

इस समस्या के पीछे सिर्फ डोपामिन ही जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि आयरन की कमी भी बड़ा कारण बन सकती है. आयरन जहां खून के निर्माण के लिए जरूरी है, वहीं यह दिमाग के सही कामकाज में भी सहायक होता है. शरीर में आयरन की कमी होने पर डोपामिन का स्तर प्रभावित हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं में यह परेशानी अस्थायी रूप से देखी गई है.

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं. शुरुआत में हल्की झनझनाहट या बेचैनी महसूस होती है, जो समय के साथ बढ़ सकती है. यह समस्या आराम की स्थिति में ज्यादा उभरती है. जैसे ही व्यक्ति लेटता है या लंबे समय तक बैठा रहता है, लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं. चलने-फिरने या पैरों को हिलाने से थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन रात में यह परेशानी अधिक बढ़ जाती है और नींद बार-बार टूटती है. अधूरी नींद के कारण दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान में कमी महसूस हो सकती है.

डॉक्टर आमतौर पर लक्षणों के आधार पर इस स्थिति का आकलन करते हैं. खून की जांच के जरिए आयरन का स्तर देखा जाता है. उपचार में जीवनशैली में सुधार, नियमित व्यायाम, सोने का निश्चित समय तय करना और जरूरत पड़ने पर दवाइयों का सहारा लिया जाता है. कैफीन का सेवन कम करना और सोने से पहले हल्का स्ट्रेचिंग करना भी लाभकारी साबित हो सकता है.

About the Author

Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *