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8 घंटे पहले
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कल 2 मार्च की रात होलिका दहन होगा। दहन से पहले होलिका के पास दीपक जलाने और परिक्रमा करने की परंपरा है। होलिका को नया अनाज भी चढ़ाया जाता है। होली क्यों मनाते हैं, इस संबंध भक्त प्रहलाद और होलिका की कहानी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। इसके बाद ये पर्व किसानों के लिए भी बहुत खास है, क्योंकि इस समय खेतों में नया अनाज पक जाता है। पुराने समय में फसल पकने की खुशी में ही होली की रात आग जलाकर उत्सव मनाया जाता था। जानिए होलिका दहन से जुड़ी मान्यताएं…
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से होलिका दहन से पहले होलिका के पास और किसी मंदिर में दीपक जलाना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही भक्त प्रहलाद की विशेष पूजा करनी चाहिए। भक्त प्रहलाद की पूजा करने से श्रीहरि की विशेष कृपा मिलती है, क्योंकि प्रहलाद श्रीहरि के परम भक्त हैं और भक्त की पूजा से स्वयं भगवान भी प्रसन्न होते हैं।
होलिका दहन के समय सावधानी पूर्वक परिवार के सभी सदस्यों को होलिका की तीन या सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय होलिका में चना, मटर, गेहूं, अलसी डालना चाहिए। होलिका में कपूर भी डालना चाहिए। इससे होली जलते समय कर्पूर का धुआं वातावरण की पवित्रता बढ़ाता है। होलिका दहन के बाद किसी मंदिर में या अपने घर में इष्टदेव को प्राकृतिक रंग-गुलाल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद घर के वरिष्ठ लोगों का आशीर्वाद लेना चाहिए। होलिका दहन के साथ ही हमें अपनी बुराइयों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।
ऐसे कर सकते हैं भगवान विष्णु की पूजा
फाल्गुन पूर्णिमा पर भगवान विष्णु का विशेष अभिषेक किया जाता है, क्योंकि इस तिथि पर प्रहलाद का जीवन विष्णु भक्ति की कृपा से ही बचा था। तभी से फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन के साथ ही विष्णु पूजन करने की परंपरा प्रचलित है। घर के मंदिर भगवान गणपति का पूजन करने के बाद विष्णु जी के साथ ही महालक्ष्मी की प्रतिमा रखें। विष्णु-लक्ष्मी का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करें। तुलसी के पत्तों के साथ मिठाई का भोग लगाएं और ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
इस साल होली पर चंद्रग्रहण
2 मार्च की रात में फाल्गुन पूर्णिमा रहेगी, इसलिए होलिका दहन इस रात में होगा, लेकिन अधिकांश पंडितों के मुताबिक चंद्रग्रहण की वजह से होली (धुलंडी) 3 नहीं, 4 मार्च को खेली जाएगी।
3 मार्च को चंद्रग्रहण होगा, जो भारत में दिखाई देगा।
ग्रहण दोपहर 3.21 बजे से शाम 6.47 मिनट तक रहेगा।
सूतक और ग्रहण के प्रभाव में रंग-गुलाल खेलना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी।
3 मार्च की शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा।
इसके अगले दिन 4 मार्च को रंगों की होली का उत्सव मनाया जाएगा।
3 मार्च की सुबह से शुरू हो जाएगा चंद्रग्रहण का सूतक
2 मार्च की शाम करीब 5.45 से पूर्णिमा शुरू हो रही है और 3 मार्च की शाम करीब 5 बजे तक रहेगी। 3 को चंद्रग्रहण दोपहर करीब 3.21 बजे से शुरू होगा और शाम 6.47 बजे तक रहेगा। यह भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक भी है। चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इस दिन सुबह 6.21 बजे सूतक शुरू होगा और शाम को 6.47 बजे ग्रहण खत्म होने तक रहेगा।
ग्रहण और सूतक के समय में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, इसलिए कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि 3 मार्च को रंग-गुलाल नहीं खेलना चाहिए। सूतक के समय में मंत्र जप, दान-पुण्य करना चाहिए। ग्रहण और सूतक की वजह से 4 मार्च को रंगों की होली (धुलंडी) मनाई जाने की सलाह दी जा रही है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान के अधिकतर पंचांगों में धुलंडी 3 मार्च को ही बताई गई है। कुछ पंडितों का कहना है कि होलिका दहन 2 मार्च की रात होगा, तो होली 3 तारीख को खेल सकते हैं, क्योकि लोक परंपराओं के अनुसार अधिकतर लोग होलिका दहन के अगले दिन ही होली खेलते हैं।
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