Waaree Energies shares: अमेरिका ने भारत से सोलर इम्पोर्ट पर 126 परसेंट टैरिफ लगाने का फैसला लिया है. बावजूद इसके एनर्जी सेक्टर से जुड़ी कंपनी वारी एनर्जीज (Waaree Energies) के शेयर को लेकर ब्रोकरेज बुलिश हैं. एक तरफ जहां सोलर पैनल के आयात पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने के अमेरिकी वाणिज्य विभाग के फैसले से दूसरे सोलर स्टॉक्स की हालत खराब है. वहीं, वारी एनर्जीज इन सबसे बेखबर है. दरअसल, वारी एनर्जीज के मैनेजमेंट ने कहा है कि अमेरिका के लगाए गए इस टैरिफ का कंपनी पर असर की कोई संभावना नहीं है.
वारी के शेयरों पर ब्रोकरेज को भरोसा
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOSFL) ने कहा कि शुरुआती 126 परसेंट काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) को लेकर चिंताओं का कंपनी पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. ब्रोकरेज ने कहा, “अमेरिका से अपनी कमाई का लगभग एक तिहाई कमाने वाली वारी एनर्जीज (WEL) अपनी US सप्लाई के लिए भारत में बने सोलर सेल का इस्तेमाल नहीं करती है इसलिए शुरुआती 126% CVD (काउंटरवेलिंग ड्यूटी) का WEL की कमाई पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. मोतीलाल ने इसके लिए 3514 का टारगेट प्राइस सेट किया है. अभी शेयरों की कीमत 2709.60 रुपये है.
नुवामा ने कहा, वारी ने अपना पहला इलेक्ट्रोलाइजर/GH2 सप्लाई ऑर्डर साइन किया, ओमान में पॉलीसिलिकॉन सप्लाई के लिए 30 मिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया ताकि सिर्फ मॉड्यूल/सेल प्ले से दूर रहा जा सके. रिटेल (20–25 परसेंट), एक्सपोर्ट/US मैन्युफैक्चरिंग (30–35 परसेंट) और EPC/O&M (18–20 परसेंट) से इसका 70 परसेंट रेवेन्यू शेयर एक दशक तक चलने वाला स्ट्रेटेजिक मोआट देता है. इसके अलावा, अगले 3–5 सालों में तेजी से ग्रोथ करने के लिए इसने नए ग्रीन बिजनेस में भी एंट्री ली है. नुवामा ने भी इसे ‘BUY’ रेटिंग देते हुए 3867 का टारगेट प्राइस दिया है.
अमेरिका में वारी की पोजीशन बेहतर
ब्रोकरेज फर्म Emkay Global का कहना है, वारी अमेरिका में अपनी सप्लाई के लिए भारत या किसी भी प्रभावित देश के सेल का इस्तेमाल नहीं करती है. इसके बजाय दूसरे ऐसे देशों से सोर्स करती है जहां अमेरिकी ड्यूटी कम है- यानी कि 10 परसेंट.
कंपनी ने अमेरिका में अपनी सप्लाई बढ़ा दी है, जिसे अलग-अलग तरह की, FEOC-कम्प्लायंट सोर्सिंग से सपोर्ट मिला है. साथ ही अमेरिका में अपनी क्षमताओं को भी बढ़ाया है. ब्रोकरेज ने कहा, कंपनी अपनी अलग-अलग तरह की नॉन-चाइना सोर्सिंग (पॉलीसिलिकॉन से) के साथ अमेरिका में अच्छी स्थिति में है. ब्रोकरेज ने इसके शेयर को 4260 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ खरीदने की सलाह दी है.
अमेरिका ने क्यों लगाया टैरिफ?
अमेरिका ने 24 फरवरी को भारत से आने वाले शिपमेंट पर लगभग 126 परसेंट की शुरुआती काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई है. यह ड्यूटी तब घोषित की गई जब उसकी ट्रेड अथॉरिटी ने शुरुआती अनुमान लगाया कि भारत में मैन्युफैक्चरर्स को गलत तरीके सब्सिडी दी जा रही है. अमेरिका का मानना है कि भारत सरकार की मदद (सस्ते में लोन उपलब्ध कराकर, टैक्स में छूट देकर या बिजली पर रियायत देकर) से भारत में बने पैनल अमेरिका में सस्ते में बिक रहे हैं. इससे अमेरिकी कंपनियों को उनका मुकाबला करने में मुश्किलें आ रही हैं और उन्हें घाटा हो रहा है. काउंटरवेलिंग ड्यूटी विदेशी सरकारों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी की भरपाई के लिए लगाई जाती है, जो कथित तौर पर एक्सपोर्टर्स को इंपोर्ट करने वाले देश में गलत कीमत का फायदा देती हैं.
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