तौबा-तौबा! बांग्लादेश से दूर भाग रहे विदेशी पर्यटक, भारतीय सैलानियों ने भी मोड़ा मुंह

Bangladesh Tourism: BNP नेता तारिक रहमान ने नए प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ रिश्ते सुधरने के कयास लगाए जा रहे हैं. दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से रिश्ते तल्ख बने हुए हैं. बांग्लादेश में साल 2024 के अगस्त महीने से राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल है.

बांग्लादेश से पर्यटक बना रहे दूरी

पहले छात्र आंदोलन, उसके बाद शेख हसीना के इस्तीफे की मांग, उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन, अंतरिम सरकार के सत्ता पर आसीन होने, अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हिंसक हमले- एक के बाद होती एक घटनाएं लगातार सुर्खियों में हैं. इन सबका असर यह है बांग्लादेश में विदेशी पयर्टकों की संख्या में कमी आई है.

पिछले साल यानी कि 2025 में यहां विदेशी पर्यटकों की संख्या में 9 परसेंट से ज्यादा की गिरावट आई है. खासतौर पर, भारत से आने वाले पर्यटकों की संख्या में 73 परसेंट की भारी कमी आई है. बांग्लादेश में अस्थिरता के माहौल को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने वीजा को लेकर पाबंदिया लगा रखी है, जिसका टूरिज्म पर असर पड़ा है. 

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के 2024 के ‘ट्रैवल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट इंडेक्स’ में बांग्लादेश 119 देशों की लिस्ट में 109वें स्थान पर है, जो एशिया-पैसिफिक रीजन में सबसे निचला स्थान है. यह आंकड़ा बांग्लादेश के लिए इसलिए अहम है क्योंकि बांग्लादेश की जीडीपी में टूरिज्म का योगदान लगभग 3.02 परसेंट है.  

सरकार की कोशिशों के बाद भी घाटा 

बांग्लादेश में सरकार टूरिज्म को मजबूत करने और रोजगार बढ़ाने के लिए पर्यटन को 12 सब-सेक्टर्स में बांटा है. यानी कि सरकार ने टूरिज्म को सिर्फ होटल तक नहीं, बल्कि कैफे, रिसॉर्ट्स, क्रूज शिप, एयरलाइन, ट्रैवल एजेंसी, म्यूजियम, हैंडिक्राफ्ट्स जैसे कई अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर रखा है, जिससे ड्राइवर से लेकर कुक, कारीगर हर किसी को रोजगार मिले.

साल 2024 में पर्यटन को हुए नुकसान के बाद बांग्लादेश के विदेशी आय में भी भारी कमी आई है. 2024 में बांग्लादेश को विदेशी कमाई में 13 मिलियन डॉलर यानी कि 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हुआ है. 

भारतीय सैलानियों ने किन देशों का किया रूख? 

वहीं, दूसरी तरफ 2025 में विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या 6.6 परसेंट बढ़कर रिकॉर्ड 3.3 करोड़ हो गई. हालांकि, सऊदी अरब और अमेरिका जाने वालों की संख्या में कमी आई है. पिछले साल कनाडा जाने वाले भारतीयों की संख्या भी लगभग 16 परसेंट घटकर 8 लाख रह गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, एक ट्रैवल एजेंट ने बताया, ”नॉन-पीक सीजन में घरेलू हवाई किराया ठीक-ठाक होने के बावजूद होटल महंगे होने के चलते भारतीय मिडिल क्लास को अब गोवा या केरल के बजाय UAE, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम और मलेशिया जैसी जगहों पर जाना सस्ता लग रहा है.”

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