6 घंटे पहले
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आज (शुक्रवार, 27 फरवरी) फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसका नाम रंगभरी और आमलकी एकादशी है। इस व्रत में भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करने की परंपरा है। पूजा-पाठ के साथ ही आज आंवले का दान और सेवन भी करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, होली यानी फाल्गुन पूर्णिमा (2 मार्च) से पहले आने वाली इस एकादशी को रंगभरी एकादशी कहते हैं, इस तिथि पर भगवान को प्राकृतिक रंग-गुलाल चढ़ाकर पूजा की जाती है। इस बार ये एकादशी शुक्रवार को होने से इस दिन महालक्ष्मी और शुक्र ग्रह की भी विशेष पूजा जरूर करें।
आंवले से जुड़ी मान्यताएं
इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा के साथ ही आंवले का दान करना चाहिए। मान्यता है कि जितना पुण्य यज्ञ करने से मिलता है, उतना ही पुण्य इस एकादशी पर आंवले के दान और पूजा से मिलता है।
आमलकी एकादशी पर बनारस में बाबा विश्वनाथ को प्राकृतिक रंग-गुलाल लगाकर होली पर्व की शुरुआत की जाती है। ब्रह्मांड पुराण के मुताबिक, इस दिन आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को बहुत प्रिय माना गया है। इस पेड़ में भगवान विष्णु के साथ ही देवी लक्ष्मी का भी वास है। इसी वजह से आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का विशेष अभिषेक किया जाता है।
पानी में आंवले का रस मिलाकर करें स्नान
आमलकी एकादशी पर गंगा, यमुना, शिप्रा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है, लेकिन जो लोग नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं, वे घर पर ही पानी में तिल, गंगाजल और आंवले का रस मिलाकर स्नान कर सकते हैं। ऐसे स्नान से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिलता है।
जानिए आमलकी एकादशी पर और कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…
- आमलकी एकादशी पर व्रत और पूजा-पाठ करने के साथ ही किसी मंदिर में या किसी सार्वजनिक जगह पर आंवले का पौधा लगाएं। घर के आसपास जहां आंवले का पेड़ है, वहां जाकर आंवले की विधिवत पूजा करें।
- आयुर्वेद में आंवले का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। इसके नियमित सेवन से कई बीमारियों की रोकथाम हो जाती है। आंवले का या इसके रस का नियमित सेवन करने से पेट और पाचन से जुड़ी बीमारियां जल्दी ठीक हो सकती हैं।
- शुक्रवार को नहाने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे से जल भरें। जल में कुमकुम, चावल डालें और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को चढ़ाएं।
- एकादशी पर घर के मंदिर में सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। गणेश पूजा के बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करने का और व्रत करने का संकल्प लें। दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का अभिषेक करें। नए वस्त्र, हार-फूल से भगवान का श्रृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते रहें।
- जो लोग एकादशी व्रत करते हैं, उन्हें दिनभर निराहार रहना चाहिए। अगर दिनभर भूखे रहना मुश्किल हो तो दूध, फल और फलों के रस का सेवन कर सकते हैं। व्रत करने वाले व्यक्ति को द्वादशी तिथि यानी 28 फरवरी की सुबह भी विष्णु पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और फिर खुद खाना खाएं, इस तरह ये व्रत पूरा होता है।
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