फरवरी-मार्च में करें गिलकी की बुवाई, 70 दिन में तैयार फसल से कमाएं तगड़ा मुनाफ

होमताजा खबरagriculture

फरवरी-मार्च में करें गिलकी की बुवाई, 70 दिन में तैयार फसल से कमाएं तगड़ा मुनाफ

Last Updated:

Gilki farming plan : गर्मियों की दस्तक के साथ सब्जी बाजार में हरी तरकारी की मांग तेजी से बढ़ने लगती है. ऐसे समय फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च के पहले पखवाड़े तक गिलकी की बुवाई किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. कम अवधि में तैयार होने वाली यह बेलदार फसल सही तकनीक और देखभाल से मजबूत आमदनी का विकल्प बन रही है.

ख़बरें फटाफट

सतना: सतना और आसपास के किसानों के लिए फरवरी का अंतिम सप्ताह और मार्च की शुरुआत कमाई का खास अवसर लेकर आती है. इस समय यदि किसान गिलकी यानी तरोई की खेती की सही तैयारी कर लें तो कम लागत में बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छा दाम दोनों हासिल किए जा सकते हैं. गर्मियों की शुरुआत में हरी सब्जियों की मांग बढ़ जाती है और ऐसे में समय पर बोई गई गिलकी किसानों की आमदनी दोगुनी करने का जरिया बन सकती है. उद्यानिकी विभाग भी इस समय इसकी बुवाई की सलाह दे रहा है ताकि किसान मौसम और बाजार दोनों का लाभ उठा सकें.

सही समय और मिट्टी का चयन है सबसे अहम
लोकल 18 से बातचीत में सोहावल विकासखंड प्रभारी उन्नयन विकास अधिकारी सुधा पटेल ने बताया कि फरवरी के अंत या मध्य मार्च तक बोई गई गिलकी का बाजार में अच्छा रेट मिल सकता है. उनके अनुसार खेत की तैयारी सबसे पहले सही तरीके से करनी चाहिए. खेत में 3 से 4 सेंटीमीटर गहराई तक खुदाई कर अच्छी तरह भुरभुरी मिट्टी तैयार करें. प्रति एकड़ लगभग 10 टन गोबर की सड़ी खाद डालना फसल के लिए बेहद लाभकारी रहता है.

जल निकासी वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी गिलकी के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यदि खेत में पानी भराव की समस्या होगी तो पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इसलिए समतल खेत की बजाय बेड या क्यारी बनाकर बुवाई करना ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी तरीका है.

 बीज चयन और बुवाई की वैज्ञानिक विधि
विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मियों की फसल के लिए उन्नत किस्मों का चयन जरूरी है. किसान पूसा चिकनी, पूसा सुप्रिया, पूसा स्नेहा, काशी दिव्या, पूसा नवीन या आलोक जैसी किस्में चुन सकते हैं. एक एकड़ में लगभग 300 से 400 ग्राम बीज पर्याप्त होता है. बुवाई से पहले बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोकर छाया में सुखा लें इससे अंकुरण अच्छा होता है. दो लाइनों के बीच 2.5 से 3 मीटर और पौधों के बीच लगभग 50 सेंटीमीटर की दूरी रखें. एक स्थान पर दो बीज डालना बेहतर माना जाता है. इससे पौधों को फैलने की पर्याप्त जगह मिलती है और बेलों का विकास अच्छा होता है.

सिंचाई, मल्चिंग और मचान विधि से बढ़ेगी पैदावार
गर्मी के मौसम में 5 से 7 दिन के अंतराल पर नियमित सिंचाई जरूरी है. फूल और फल बनने के समय खेत में पर्याप्त नमी रहना आवश्यक है. खरपतवार नियंत्रण और नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग का प्रयोग करें जिससे उत्पादन में भी वृद्धि होती है.

इन तरीकों का करे इस्तेमाल 
मचान या जाल विधि अपनाने से बेलें ऊपर चढ़ती हैं और फल सीधे, साफ तथा आकर्षक आकार के मिलते हैं. बाजार में ऐसे फलों को बेहतर भाव मिलता है. गिलकी की फसल में फल मक्खी, लाल मकड़ी और पाउडरी मिल्ड्यू का खतरा रहता है. शुरुआत से ही सतर्क रहकर उचित कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए. समय पर देखभाल करने पर 70 से 80 दिनों में फसल तैयार हो जाती है. यदि सभी कृषि तकनीकों का पालन किया जाए तो किसान प्रति एकड़ लगभग 100 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. फलों को 6 से 8 दिन के अंतराल पर मुलायम अवस्था में तोड़ना चाहिए और तुड़ाई के बाद छायादार स्थान पर रखना चाहिए.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *