Video: सिर्फ ₹1 में ‘इको-फ्रेंडली’ थाली! सखुआ के पत्तों से लिखी जा रही आत्मनिर्भरता की कहानी

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सिर्फ ₹1 में इको-फ्रेंडली थाली! सखुआ के पत्तों से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

 

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Success Story: आधुनिक चकाचौंध और प्लास्टिक के बढ़ते चलन के बीच आज भी जमुई जिले का बिंझी गांव अपनी पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए है. सोनो प्रखंड का यह आदिवासी गांव पत्तल विलेज के नाम से जाना जाता है. जहां हर घर में सखुआ (साल) के पत्तों से प्राकृतिक प्लेट्स तैयार की जाती हैं. गांव की सुनीता टुडू बताती हैं कि एक पत्तल तैयार करने के पीछे गहरी मेहनत छिपी है. हर सुबह पथरीली पगडंडियों और जंगली जानवरों के डर के बीच महिलाएं जंगलों से सखुआ के पत्ते चुनकर लाती हैं. घर आकर इन्हें कुशलता से सीला जाता है। इन पत्तलों में भोजन करना न केवल स्वास्थ्यवर्धक है, बल्कि यह पूरी तरह से इको-फ्रेंडली भी है. हैरानी की बात यह है कि इतनी मेहनत के बाद भी ये पत्तल बाजार में मात्र ₹1 से ₹2 प्रति पीस की दर से बिकते हैं. ग्रामीण 10 किलोमीटर पैदल चलकर बाटिया बाजार में इन्हें बेचने जाते हैं. शीतल सोरेन जैसे ग्रामीणों का कहना है कि थर्मोकोल के बढ़ते चलन ने उनकी जीविका पर असर डाला है, लेकिन पारंपरिक शुद्धता के कारण आज भी जागरूक लोग इसकी मांग करते हैं.

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