रूस को तोड़ने की बहुत कोशिश हुई. उसके ऊपर प्रतिबंध लगाए गए. यूक्रेन युद्ध के कारण उसे अलग-थलग करने की कोशिश हुई. मगर रूस न झुका और न टूटा. तेल के खेल में रूस अब भी बाजीगर बना हुआ है. जी हां, रिपोर्ट में कहा गया है कि पाबंदियों के बावजूद रूस का तेल एक्सपोर्ट 2022 के यूक्रेन युद्ध से पहले के लेवल से ऊपर बना हुआ है. एक नए एनालिसिस से पता चलता है कि रूस 2022 में यूक्रेन पर हमले से पहले की तुलना में अधिक क्रूड ऑयल शिप कर रहा है, भले ही पिछले साल कुल एक्सपोर्ट में गिरावट आई हो. यह तब है जब यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए थे.
रिसर्चर्स के मुताबिक, यूक्रेन जंग के चौथे साल में शिपमेंट का कुल वॉल्यूम अभी भी युद्ध से पहले के आंकड़ों से लगभग छह परसेंट अधिक है. यह पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को के एनर्जी ट्रेड को रोकने के मकसद से लगाए गए बैन के बावजूद हुआ है. फिनलैंड के थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के पब्लिश किए गए नतीजों से पता चलता है कि नियमों को लागू करने में कमी की वजह से एक्सपोर्ट का लेवल ऊंचा बना हुआ है. हालांकि उपायों ने शिपिंग नेटवर्क और ट्रेड रूट को टारगेट किया है, लेकिन उन्होंने रूसी क्रूड ऑयल के फ्लो को पूरी तरह से रोका नहीं है.
हल्की गिरावट तब भी रूस आगे
हालांकि, एक्सपोर्ट वॉल्यूम काफी मजबूत बना हुआ है, लेकिन फॉसिल फ्यूल एक्सपोर्ट से रूस की कमाई पर असर पड़ा है. एनालिस्ट्स ने इनकम में काफी गिरावट देखी है, जो काफी हद तक डिस्काउंटेड प्राइसिंग की वजह से है. 24 फरवरी तक के 12 महीनों में क्रूड शिपमेंट से होने वाली कमाई पिछले साल के मुकाबले 18 परसेंट घटकर 85.5 बिलियन यूरो रह गई.
कैसे रूस कर रहा गेम
CREA के एनालिस्ट और रिपोर्ट के को-ऑथर आइज़ैक लेवी ने कहा, ‘नए उपायों और अधिक सख्ती की वजह से हमने रूस के फॉसिल फ्यूल एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई में काफी गिरावट देखी है.’ साथ ही इसी समय के दौरान एक्सपोर्ट की गई कुल मात्रा में मामूली छह परसेंट की गिरावट आई, जो 215 मिलियन टन तक पहुंच गई.
लगातार एक्सपोर्ट वॉल्यूम के पीछे एक बड़ा कारण रिसर्चर्स के अनुसार शैडो फ्लीट का इस्तेमाल है. ये पुराने टैंकर होते हैं, जिनके ओनरशिप स्ट्रक्चर साफ नहीं होते. जिन्हें अक्सर यूरोपियन यूनियन, यूनाइटेड स्टेट्स और G7 देशों द्वारा लगाई गई पाबंदियों को बायपास करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
क्यों रूस अब भी तेल के खेल में बाजीगर
लेवी ने बताया कि सख्ती अभी भी अधूरी है. उन्होंने कहा, ‘अभी भी कई बड़ी कमियां और ऐसे एरिया हैं जिन पर रोक लगाने वाले देशों ने ध्यान नहीं दिया है.’ इन कमियों में नकली झंडों के नीचे चलने वाले जहाज और रूसी क्रूड से बने रिफाइंड फ्यूल का दोबारा एक्सपोर्ट जैसी प्रैक्टिस शामिल हैं. इसे ठीक करने के लिए उन्होंने और कड़े नियम बनाने का सुझाव दिया. ‘हम किसी भी रिफाइनरी या स्टोरेज टर्मिनल से इंपोर्ट पर बैन लगाने का प्रस्ताव करते हैं, जिसे पिछले छह महीनों में रूसी तेल का शिपमेंट मिला हो.’
पश्चिम के सामने अब भी डटा है रूस
ज़्यादातर रूसी क्रूड अब कुछ ही देशों को भेजा जाता है. चीन, भारत और तुर्की मिलकर इन एक्सपोर्ट का 93 प्रतिशत हिस्सा थे, जो ट्रेड पैटर्न में बड़े बदलाव को दिखाता है. रिपोर्ट में यूरोप में भी कड़े कदम उठाने की बात कही गई है. इसमें यूरोप और यूके के समुद्र तटों पर पर्यावरण और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए शैडो फ्लीट से जुड़े जहाजों को रोकने की सलाह दी गई है. इसके अलावा इसमें हंगरी और स्लोवाकिया- EU की पाबंदियों से छूट वाले देश- द्वारा लगातार इंपोर्ट पर भी ज़ोर दिया गया है, जिससे 2025 के पहले दस महीनों में एक साल पहले की तुलना में उनका इंटेक 11 प्रतिशत बढ़ गया.
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