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नॉर्थ कोरिया किम जोंग उन: दुनिया भर में जिस एक देश को लेकर सबसे कम जानकारी सामने आती है, वो उत्तर कोरिया है. एक बार फिर से उत्तर कोरिया में यहां के टॉप लीडर किम जोंग उन को सत्ताधारी पार्टी का नेता घोषित कर दिया गया है. उन्हें पार्टी का महासचिव चुना गया है और वो अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को और ज्यादा बढ़ाने के मूड में हैं.
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन को यहां की सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के टॉप लीडर के तौर पर चुना गया है. उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक हजारों प्रतिनिधियों के एकमत से किम जोंग उन को पार्टी का महासचिव चुना गया. यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर कोरिया अपने परमाणु और सैन्य कार्यक्रमों को और आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहा है.
हर पांच साल में आयोजित होने वाली पार्टी कांग्रेस ने इस बार भी राजधानी प्योंगयांग में भव्य आयोजन के साथ शुरुआत की. यह केवल नेतृत्व चयन का मंच नहीं, बल्कि आने वाले 5 सालों की राजनीतिक और सैन्य दिशा तय करने का अवसर भी है. माना जा रहा है कि किम इस कांग्रेस में परमाणु हथियार कार्यक्रम को और तेज करने तथा पारंपरिक सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करने की विस्तृत योजना पेश कर सकते हैं.
सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने बताया कि प्रतिनिधियों ने देश के परमाणु शस्त्रागार को मजबूत करने और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने का श्रेय किम को दिया. उत्तर कोरिया पहले ही ऐसी लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर चुका है जो एशिया में अमेरिकी सहयोगियों के साथ-साथ अमेरिकी मुख्य भूमि तक को निशाना बना सकती हैं.
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विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मिसाइल परीक्षण और हथियारों को और एडवांस बनाने की रफ्तार बढ़ सकती है. किम जोंग उन साल 2011 में अपने पिता किम जोंग इल की मृत्यु के बाद सत्ता में आए थे. युवा उम्र में सत्ता संभालने वाले किम ने शुरुआत से ही परमाणु हथियारों को अपनी सुरक्षा नीति का केंद्रीय आधार बनाया.
किम जोंग उन के शासनकाल में उत्तर कोरिया ने कई मिसाइल परीक्षण किए और खुद को एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश की. विश्लेषकों का यह भी मानना है कि किम पारंपरिक सैन्य बलों को परमाणु क्षमताओं के साथ एकीकृत करने पर जोर दे सकते हैं, ताकि युद्ध की स्थिति में मल्टी लेवल की जवाबी क्षमता विकसित की जा सके.
किम जोंग उन ने चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने और रूस को हथियार निर्यात से मिली आर्थिक बढ़त का फायदा उठाने की नीति अपनाई है. इसके बावजूद, किम आत्मनिर्भरता को दोहराते हुए घरेलू उत्पादन और सैन्य स्वावलंबन पर जोर देने की संभावना है. दक्षिण कोरिया और अमेरिका के साथ संबंधों में भी सख्ती जारी रह सकती है. 2024 में किम ने दक्षिण कोरिया को स्थायी दुश्मन घोषित कर संबंधों में और तनाव पैदा कर दिया था, जबकि साल 2019 के बाद से उनकी अमेरिका से कोई कूटनीतिक वार्ता नहीं हुई है.
कुल मिलाकर किम जोंग उन का फिर से पार्टी के शीर्ष पद पर चुना जाना इस बात का संकेत है कि उत्तर कोरिया आने वाले वर्षों में अपनी परमाणु नीति और सैन्य रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगा. इससे पूर्वी एशिया में सुरक्षा संतुलन पर दूरगामी असर पड़ सकता है. (All Photos Credit- Reuters)
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