मानसिक शांति के लिए लोग कैसे फॉलो कर रहे ‘डिजिटल सनसेट ट्रेंड’? तनाव से मुक्ति का नया मंत्र, इस तरह आप भी आजमाएं!

How To Reduce Screen Time Before Bed : आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में, अगर कोई चीज़ हर काम में हमारी सबसे अधिक मदद कर रही है, तो वह है इंटरनेट की सुविधा. चाहे ऑफिस का काम फटाफट निपटाना हो, पैरेंटिंग में गाइडेंस चाहिए हो, सही डाइट प्लान बनाना हो या मनोरंजन करना, इंटरनेट हमारा मुख्य सहारा बन चुका है. लेकिन यह जानना भी ज़रूरी है कि जब तक यह सहारा आपके काम को आसान बना रहा है, तब तक तो ठीक है; पर अगर यही आपको मानसिक रूप से पंगु बनाने लगे या आपके दिन-रात का चैन छीन ले, तो अपने रूटीन और आदतों को ‘रीसेट’ करना अनिवार्य हो जाता है.

दरअसल, आज के 5G की रफ्तार वाले दौर में, हम अपनों से भले ही दूर हों, लेकिन अपने स्मार्टफोन के सबसे करीब हैं. सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक, हमारी उंगलियां बस स्क्रीन पर स्क्रॉल करती रहती हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि यही ‘स्मार्ट’ फोन हमारी मानसिक शांति का सबसे बड़ा दुश्मन बनता जा रहा है? इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए इन दिनों एक नया लाइफस्टाइल ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे नाम दिया गया है- ‘डिजिटल सनसेट’ (Digital Sunset).  आइए जानते हैं क्या है यह ट्रेंड और क्यों आज हर कोई इसे आजमाना चाहता है.

क्या है ‘डिजिटल सनसेट’?
जैसे ही सूरज ढलता है, प्रकृति शांत होने लगती है और जीव-जंतु आराम की मुद्रा में आ जाते हैं. ‘डिजिटल सनसेट’ का कॉन्सेप्ट भी इसी पर आधारित है. इसका सीधा सा मतलब है- सोने से कम से कम 1 से 2 घंटे पहले अपने सभी डिजिटल उपकरणों (जैसे स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और टैबलेट) को पूरी तरह से बंद कर देना. यह केवल फोन स्विच ऑफ करना नहीं है, बल्कि अपने दिमाग को ‘ऑफ’ मोड पर ले जाने की एक प्रक्रिया है.

लोग इसे क्यों अपना रहे हैं?

हेल्‍थलाइन के विशेषज्ञों का मानना है कि हमारे स्मार्टफोन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) हमारे मस्तिष्क में ‘मेलाटोनिन’ नामक हार्मोन के उत्पादन को रोक देती है. यह वही हार्मोन है जो हमें सुकून की नींद सुलाने में मदद करता है.

डिजिटल सनसेट फॉलो करने के मुख्य फायदे:
1.गहरी और अच्छी नींद:
जब आप स्क्रीन से दूर होते हैं, तो आपका दिमाग नेचुरल रूप से थकने लगता है और आपको बिना किसी रुकावट के गहरी नींद आती है.

2.तनाव और एंग्जायटी में कमी: सोशल मीडिया पर दूसरों की ‘परफेक्ट लाइफ’ देखना और लगातार खबरों का अपडेट लेना मानसिक तनाव पैदा करता है. डिजिटल सनसेट इस दबाव को खत्म करता है.

3.एकाग्रता (Focus) में सुधार: रात को सुकून से सोने के कारण अगले दिन आपकी कार्यक्षमता और फोकस 40% तक बढ़ जाता है.

4.रिश्तों में मजबूती: फोन छोड़कर लोग अपने परिवार और पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिता रहे हैं, जिससे आपसी रिश्ते बेहतर हो रहे हैं.

कैसे फॉलो करें ‘डिजिटल सनसेट’?
अगर आप भी इसे आजमाना चाहते हैं, तो इन आसान तरीकों से शुरुआत करें:

  • कर्फ्यू टाइम तय करें: रात को अगर आप 11 बजे सोते हैं, तो रात 9:30 या 10 बजे का ‘डिजिटल कर्फ्यू’ समय तय करें.
  • फोन को दूसरे कमरे में रखें: फोन को अपने बेड के पास न रखें. कोशिश करें कि इसे दूसरे कमरे में या चार्जिंग स्टेशन पर रख दें.
  • एनालॉग अलार्म घड़ी खरीदें: फोन को पास रखने का सबसे बड़ा बहाना ‘अलार्म’ होता है. एक पुरानी एनालॉग घड़ी खरीदें ताकि आपको सुबह उठने के लिए फोन न छूना पड़े.
  • अलग शौक अपनाएं: स्क्रीन की जगह किताब पढ़ें, डायरी लिखें, मेडिटेशन करें या बस शांत बैठकर संगीत सुनें.

डिजिटल सनसेट कोई मुश्किल नियम नहीं, बल्कि सेल्‍फ केयर का एक तरीका है. शुरुआत में आपको थोड़ा अजीब लग सकता है और बार-बार फोन चेक करने की इच्छा हो सकती है (जिसे ‘नोमोफोबिया’ कहा जाता है), लेकिन 3 से 4 दिनों के भीतर आप अपनी मानसिक शांति में भारी बदलाव महसूस करेंगे.

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