पानी में गिरा फिर भी सुरक्षित! स्मार्टफोन की वाटरप्रूफ टेक्नोलॉजी का राज जानकर रह जाएंगे हैरान

Smartphone Waterproofing: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में अगर फोन अचानक पानी में गिर जाए तो दिल की धड़कन बढ़ना स्वाभाविक है. लेकिन अब टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है कि कई स्मार्टफोन पानी में गिरने के बाद भी सुरक्षित रह सकते हैं. आखिर ऐसा कैसे संभव होता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की असली तकनीक.

IP रेटिंग क्या होती है?

वॉटरप्रूफ या वॉटर-रेसिस्टेंट स्मार्टफोन पर अक्सर IP67 या IP68 जैसी रेटिंग लिखी होती है. IP का मतलब होता है Ingress Protection यानी बाहरी तत्वों से सुरक्षा. इसमें पहला नंबर धूल से सुरक्षा को दर्शाता है और दूसरा नंबर पानी से बचाव को. उदाहरण के तौर पर IP68 रेटिंग वाला फोन सीमित समय तक पानी में डूबा रहने के बाद भी काम कर सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि फोन को जानबूझकर पानी में डालना सुरक्षित है.

अंदर से कैसे सुरक्षित रहता है फोन?

स्मार्टफोन को पानी से बचाने के लिए उसके अंदर खास सीलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. फोन के जॉइंट्स, बटन और पोर्ट्स पर रबर गैस्केट और सिलिकॉन सील लगाए जाते हैं ताकि पानी अंदर न जा सके. इसके अलावा मदरबोर्ड पर एक खास नैनो-कोटिंग की जाती है जो नमी से सर्किट को सुरक्षित रखती है.

स्पीकर और माइक्रोफोन के हिस्सों में भी माइक्रो-मेश या वॉटर-रेपेलेंट मटेरियल लगाया जाता है जिससे आवाज बाहर जा सके लेकिन पानी अंदर न पहुंचे. यही वजह है कि बारिश में भी फोन अक्सर सामान्य रूप से काम करता रहता है.

क्या पूरी तरह वॉटरप्रूफ होता है फोन?

अक्सर लोग वॉटर-रेसिस्टेंट और वॉटरप्रूफ को एक जैसा समझ लेते हैं जबकि दोनों में फर्क है. ज्यादातर स्मार्टफोन पूरी तरह वॉटरप्रूफ नहीं होते बल्कि सीमित समय और गहराई तक ही पानी से सुरक्षित रहते हैं. नमक वाला पानी, साबुन मिला पानी या स्विमिंग पूल का क्लोरीन युक्त पानी फोन को नुकसान पहुंचा सकता है. इसके अलावा समय के साथ फोन की सीलिंग कमजोर भी हो सकती है खासकर अगर फोन गिर चुका हो या उसकी मरम्मत हुई हो.

पानी में गिर जाए तो क्या करें?

अगर आपका फोन पानी में गिर जाए तो तुरंत उसे बाहर निकालें और बंद कर दें. उसे झटकने या चार्ज पर लगाने की गलती न करें. सूखे कपड़े से पोंछकर उसे प्राकृतिक हवा में सुखने दें. जरूरत पड़े तो सर्विस सेंटर से जांच कराना बेहतर होता है.

टेक्नोलॉजी ने भले ही स्मार्टफोन को पानी से काफी हद तक सुरक्षित बना दिया हो लेकिन सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है. इसलिए वाटरप्रूफिंग पर भरोसा करें पर लापरवाही न बरतें.

यह भी पढ़ें:

Smart TV हो गया है स्लो? रिमोट तोड़ने से नहीं चलेगा काम, तुरंत करें ये 5 आसान काम, मिनटों में हो जाएगा सुपरफास्ट

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *