Agri Tips: रांची के किसान का कमाल! एक पौधे से 5 किलो बैंगन! तैयार किया अमर पौधा, हर दूसरे दिन 2 हजार की कमाई

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रांची के किसान का कमाल! एक पौधे से 5 किलो बैंगन! हर दूसरे दिन 2 हजार की कमाई

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Brinjal Farming Tips: रांची के कांके निवासी मनोज महतो ने बैंगन की खेती में ‘ग्राफ्टिंग’ और ‘मल्चिंग’ तकनीक का इस्तेमाल कर मिसाल पेश की है. एक पौधे से 5 किलो पैदावार लेकर वे हर दूसरे दिन हजारों की कमाई कर रहे हैं. उनकी सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी अब ग्राफ्टिंग तकनीक सीखने के लिए उनके पास पहुँच रहे हैं.

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची का कांके क्षेत्र इन दिनों एक खास तरह के बैंगन की खेती के लिए चर्चा में है. यहां के किसान मनोज महतो ने बैंगन उगाने की पारंपरिक पद्धति को छोड़कर आधुनिक ग्राफ्टिंग (कलम विधि) तकनीक को अपनाया है. इस तकनीक का नतीजा यह है कि उनके एक ही पौधे में 4 से 5 किलो तक बैंगन फल रहे हैं. जिससे उनकी आय में भारी इजाफा हुआ है. आइए जानते हैं इनकी विधि और कमाई का फॉर्मूला.

जंगली कुटमा और बैंगन का अनूठा मिलन
मनोज बताते हैं कि वे सीधे बीज न लगाकर ग्राफ्टेड पौधों का उपयोग करते हैं. इसके पीछे एक दिलचस्प वैज्ञानिक तकनीक है. सबसे पहले एक जंगली कुटमा पौधे की टहनी ली जाती है. फिर उन्नत किस्म के बैंगन की टहनी को उसके साथ कलम के माध्यम से जोड़ा जाता है. इस संयुक्त पौधे को बालू में रखकर तैयार किया जाता है और फिर खेत में रोपा जाता है. मनोज इसे अमर पौधा कहते हैं क्योंकि जंगली कुटमा की जड़ें बेहद मजबूत होती हैं. जिससे बैंगन के पौधे की सहनशक्ति बढ़ जाती है. वह जल्दी सूखता या मरता नहीं है.

पानी की बचत और खरपतवार से सुरक्षा
खेती को अधिक मुनाफेमंद बनाने के लिए मनोज मल्चिंग पेपर का इस्तेमाल करते हैं. इसके कई फायदे हैं. पॉइंट टू पॉइंट सिंचाई से पानी सीधा पौधों की जड़ों तक जाता है. जिससे बर्बादी नहीं होती. पेपर की वजह से अनावश्यक घास नहीं उगती. जिससे मिट्टी के पोषक तत्व सिर्फ मुख्य पौधे को मिलते हैं. खाद और दवाइयां सीधे जड़ों तक पहुंचती हैं. जिससे कम मात्रा में भी बेहतर परिणाम मिलते हैं.

जैविक खाद और नीम के तेल का जादू
कीटों से बचाव के लिए मनोज बाजारू रसायनों के बजाय जैविक समाधानों पर जोर देते हैं. वे समय-समय पर सूखे गोबर, नीम के उबले हुए पानी और केंचुआ खाद का प्रयोग करते हैं. उनका सुझाव है कि यूरिया का प्रयोग बहुत कम करना चाहिए और मिट्टी की नमी पूरी तरह सूखने के बाद ही पानी देना चाहिए.

कमाई का गणित
मनोज के अनुसार इस तकनीक से तैयार बैंगन दिखने में बेहद खूबसूरत और चमकदार होते हैं. जिनकी बाजार में भारी मांग है. वे हर दूसरे-तीसरे दिन लगभग ₹2000 के बैंगन बेच लेते हैं. उनकी सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी अब ग्राफ्टिंग तकनीक सीखने के लिए उनके पास पहुँच रहे हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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