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Success Story: छपरा के युवा प्रगतिशील किसान अभिषेक कुमार ने आत्मा से प्रशिक्षण लेकर फूलों की खेती को मुनाफे का आधुनिक व्यवसाय बना दिया है. अपनी तीसरी पुश्तैनी पीढ़ी के काम को नई तकनीक से जोड़ते हुए अभिषेक अब खुद की नर्सरी में 50 से अधिक वैरायटी के गुलाब तैयार कर रहे हैं. उनके टाटा सेंचुरी और मल्टीकलर गुलाबों की खासियत यह है कि वे 20 दिनों तक ताजे रहते हैं. एक ही पौधे में कई रंगों के फूल खिलते हैं.
छपरा: बिहार के युवा अब पारंपरिक खेती के बजाय तकनीक और प्रशिक्षण के दम पर कृषि को लाभ का सौदा बना रहे हैं. छपरा के युवा प्रगतिशील किसान अभिषेक कुमार इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. अभिषेक ने अपनी पुश्तैनी फूलों की नर्सरी को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़कर जिले में एक नई पहचान बनाई है.
आत्मा के प्रशिक्षण ने बदली तकदीर
अभिषेक बताते हैं कि उनके परिवार की यह तीसरी पीढ़ी है जो नर्सरी के व्यवसाय से जुड़ी है. उनके पूर्वज दूसरे शहरों से फूल और पौधे खरीदकर बेचा करते थे. जिससे मुनाफा कम होता था. लेकिन अभिषेक ने आत्मा से विधिवत प्रशिक्षण लिया और खुद ही पौधे तैयार करने की तकनीक सीखी. आज वे न सिर्फ पौधे तैयार कर रहे हैं, बल्कि हाइब्रिड वैरायटी के साथ प्रयोग कर अद्भुत परिणाम दे रहे हैं.
50 से अधिक वैरायटी और मल्टीकलर गुलाब की धूम
अभिषेक की नर्सरी की सबसे बड़ी खासियत उनके द्वारा तैयार किए गए टाटा सेंचुरी गुलाब हैं. इन गुलाबों की विशेषताएं ग्राहकों को उनकी ओर खींच लाती हैं. जैसे मल्टीकलर का जादू. एक ही फूल के अंदर कई रंग समाहित होते हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं. ग्राफ्टिंग का हुनर. अभिषेक ने कलम के माध्यम से एक ही पौधे में अलग-अलग रंगों के फूल खिलाने की तकनीक विकसित की है. जहां आम गुलाब जल्दी मुरझा जाते हैं, वहीं अभिषेक के हाइब्रिड गुलाब 15 से 20 दिनों तक खिले रहते हैं. इन पौधों में कांटे बेहद कम होते हैं. जिससे इन्हें संभालना आसान होता है. अभिषेक के पास डच रोज, ब्रिटिश रोज और टाटा सेंचुरी सहित अंग्रेजी गुलाब की 50 से अधिक वैरायटी उपलब्ध हैं.
जैविक खाद से बढ़ता है पौधों का दम
अभिषेक अपनी नर्सरी में रसायनों के बजाय जैविक खाद का उपयोग करते हैं. उनका मानना है कि जैविक खाद से पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और फूलों की चमक व खुशबू लंबे समय तक बरकरार रहती है. इसी गुणवत्ता के कारण छपरा शहर के थाना चौक स्थित उनकी नर्सरी पर ग्राहकों का तांता लगा रहता है.
युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
सबसे कम उम्र के प्रगतिशील किसान होने का गौरव प्राप्त करने वाले अभिषेक अब अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं. उनका कहना है कि यदि युवा किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं, तो फूलों की खेती में अपार संभावनाएं हैं. अभिषेक की सफलता यह साबित करती है कि हुनर और सही मार्गदर्शन मिले तो मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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