भारत की सबसे ज्यादा फॉलो की जाने वाली फूड क्रिएटर्स में से एक नताशा गांधी की रील आपने भी शायद किसी रेसपी के लिए सेव करके अपने फोन में जरूर रखी होगी. 32 साल की नताशा मुंबई की मुलुंड में पली-बढ़ीं, जहां बचपन से कुकिंग शोज देखती थीं और नोटबुक में रेसिपी लिखती रहती थीं. उन्होंने निगेला लॉसन की चॉकलेट लावा केक को स्टील की कटोरी में बनाकर खाया था, वो भी कैडबरी कोको पाउडर से. लेकिन इस फेमस क्रिएटर की शुरुआत कुकिंग से नहीं बल्कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी यानी सीए की पढ़ाई से हुई.
नताशा रात भर सीए की पढ़ाई करती थीं और एनर्जी के लिए कुछ न कुछ नया खाना बनाया करती थीं. चाट, फ्रैंकी, पास्ता जैसी चीजों से उन्होंने एक्सपेरिमेंट शुरू किया. साल 2017-18 में एक फिनटेक स्टार्टअप में फ्रॉड इन्वेस्टिगेटर की जॉब की, लेकिन दिल तो मसालों में बसा हुआ था. सीए फाइनल्स की तैयारी में पांचवीं बार एग्जाम दिया, लेकिन रिजल्ट आने से पहले नताशा ने साल 2018 में 2000 रुपये का दो दिन का बेकिंग कोर्स जॉइन कर लिया. आर्टिकलशिप की 3000 रुपये मंथली स्टाइपेंड से 40 हजार रुपये बचाए और अपने पापा को मनाकर ओटीजी ओवन, हाई-ग्रेड मिक्सर, इलेक्ट्रिक व्हिस्क और बेसिक सामान खरीद लिया.
पापा के लिए बनाई खास डिश
नताशा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनके पापा को स्वीट्स बहुत पसंद थे, लेकिन उन्हें बॉर्डरलाइन डायबिटीज हो गया, तो नताशा ने मिलेट्स फ्लोर और अल्टरनेटिव स्वीटनर से हेल्दी डेजर्ट्स बनाने शुरू किए. छह महीने लगे, लेकिन आखिरकार बादाम-स्ट्रॉबेरी टी केक की रेसिपी क्रैक हो गई. नवंबर 2018 में मिलेट्स बेस्ड डेजर्ट्स, ग्रीक योगर्ट फ्रॉस्टिंग या होममेड हेजलनट-चॉकलेट स्प्रेड के साथ एक छोटा सा मेन्यू बनाया. इसके बाद ही उन्होंने इंस्टाग्राम पेज शुरू किया ‘हाउस ऑफ मिलेट्स’ जोकि ग्लूटेन-फ्री, वेगन और मिलेट्स पर फोकस करके बनाया.
माता-पिता ने दिया सहारा
उन्होंने सबसे पहले दोस्तों और इन्फ्लुएंसर्स को सैंपल भेजे. धीरे-धीरे उन्हें 50-60 ऑर्डर्स आने लगे. 15 जनवरी 2019 को उनके सीए एग्जाम का रिजल्ट आया जिसमें वह सीए फेल हो गई थी. लेकिन माता-पिता को उनके ऊपर पूरा भरोसा था. उन्होंने कहा, ‘कम से कम केक बिजनेस तो अच्छा चल रहा है.’ नताशा को इस बात से ही साहस मिला और फिर उन्होंने अपने बिजनेस को और बढ़ाया. वह फूडहॉल कुकरी स्टूडियो में सोशल मीडिया हैंडल करने लगीं, वहां शेफ्स जैसे मनप्रीत धोडी से सीखा और विजिटिंग शेफ्स से मिलीं.
मास्टरशेफ इंडिया से मिली उड़ान
छह महीने बाद टीवी शो का ऑडिशन कॉल आया और वो भी कोई आम शो नहीं बल्कि मास्टरशेफ इंडिया था. उनकी ऑडिशन डिश मिलेट पास्ता विद मखनी सॉस ने सीजन की पहली एप्रन दिलाई. जज ने टेक्सचर की तारीफ की और वहीं, से उनकी जिंदगी पलट गई. अगले महीनों में एवोकाडो आइसक्रीम, एप्पल फ्रोयो, गुजराती कढ़ी जैसे डिशेज से टॉप 5 में पहुंचीं. शो फरवरी 2020 में खत्म हुआ. शो के बाद वह कई रेसिपी वर्कशॉप्स, इवेंट्स में जाने लगी. फॉलोअर्स 2000 से 60 हजार हो गए. फिर कोविड आया तो लोग घर पर ही अलग-अलग रेसिपी बनाने लगे फिर चाहे वो चाय हो या फिर छोले-चावल. नताशा घर में सारी रिकॉर्डिंग करती थी उनकी बहन कैमरा पकड़ती थी और वह वीडियो बनाते-बनाते पूरा दिन रात एक कर देती थी. इसका रिस्पॉन्स भी उन्हें तुरंत मिला, आज उनके वीडियोज मिलियंस व्यूज पाते हैं.
पति के साथ मिलकर किया काम
नताशा की खासियत सीरीज ‘बिरयानिस फ्रॉम इंडिया’ में दर्जनों रीजनल वैरिएशंस, ‘पास्टास फ्रॉम इंडिया’ में गुजरात की दल धोकली, बिहार की दल की दुल्हन, केरल की पिडियुम कोझियुम को पास्ता बताया. पहले सिर्फ वेज रेसिपी बनाती थीं, लेकिन पति विनायक ग्रोवर (फूड फोटोग्राफर) को रीढ़ में चोट लग जाने की वजह से उन्होंने बिरयानी बनाने से रिसर्च शुरू की. हैदराबादी, लखनवी से आगे केरल के सिरियन कैथोलिक्स की अटेराची बिरयानी तक, सब सीख लिया. 50 बिरयानियों की उन्होंने लिस्ट बनाई. पति-पत्नी ने साथ काम करना शुरू किया और बहन सोशल मीडिया मैनेज करने लगी.
नताशा का मकसद सिर्फ कुकिंग नहीं है, बल्कि इंडियन रीजनल क्विजीन को सेलिब्रेट करना, हेल्दी ईटिंग को एक्सेसिबल बनाना है. हाउस ऑफ मिलेट्स अब डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड है, जो न्यूट्रिशन पर फोकस करता है. फोर्ब्स टॉप 100 डिजिटल स्टार्स में भी शामिल, वह जॉफ फूड्स की डिजिटल एंबेसडर हैं. जो लड़की सीए फेल होने पर उदास हुई थी, वो अब लाखों लोगों को किचन में कॉन्फिडेंस दे रही है.
.