मध्य प्रदेश का ये गांव है सरकारी नौकरी की ‘फैक्ट्री’, जज, कुलपति और सांसद भी यहां से निकले

बुंदेलखंड के सागर में एक छोटा सा गांव ढाना है, जिसे जिले का सबसे अमीर गांव कहा जाता है. क्योंकि यहां महानगरों की तरह हवाई पट्टी है और जल्द ही इसका एयरपोर्ट के रूप में विस्तारीकरण प्रस्तावित है. यहां पर मराठा रेजीमेंट है. इस गांव से सागर जबलपुर स्टेट हाईवे भी निकला हुआ है. लेकिन यह गांव सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी करने वाले लोगों के लिए जाना जाता है और इसकी दूसरी पहचान सरकारी नौकरी वाले गांव के रूप में ही है और यह सिलसिला पिछले कई दशकों से बना हुआ है. इसका अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि यहां एक छोटे सिपाही से लेकर एडीजीपी तक की रैंक तक लोग पहुंचे हैं. यहां से निकले व्यक्ति माखनलाल यूनिवर्सिटी में कुलपति भी रहे.

लगभग हर दूसरे घर से सरकारी नौकरी में हैं ढाना गांव के लोग
ढाना गांव के लोग डॉक्टर, न्यायाधीश, कमिश्नर, कृषि वैज्ञानिक, सरकारी वकील, एयर स्पेस, आर्मी, होमगार्ड, शिक्षक ,पुलिस , बिजली विभाग, इंजीनियर जैसी अलग-अलग फील्ड में काम कर रहे हैं. यहां से लगभग हर दूसरे घर से कोई ना कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी में है. ग्रामीणों के अनुसार इस गांव में जितने भी घर मिलेंगे. उसमें 80% परिवार से लोग सरकारी नौकरी में है, जो लोग नौकरी नहीं कर रहे उनके पास या तो खुद की खेती किसानी है, नहीं तो प्राइवेट सेक्टर में भी अच्छी खासी नौकरी कर रहे हैं.

शिक्षा के प्रति जागरूक हैं गांव के लोग
गांव की वोटर 6000 के आसपास है जबकि आबादी 10000 है. यहां लगभग डेढ़ हजार से 2000 लोग सरकारी नौकरी में है. इसी गांव के एम के पटेरिया 70 के दशक में डीआईजी हुआ करते थे, जो वर्तमान में एडीजीपी की रैंक के बराबर है. इसकी एक वजह ग्रामीणों में पढ़ाई के प्रति जागरूकता से उच्च शिक्षा हासिल करना. अपने आप को कॉम्पिटेटिव एग्जाम में खड़ा करना. दूसरा लोग यहां विराजे भगवान भोलेनाथ की कृपा मानते हैं स्वयंभू शिवलिंग को पटनेश्वर धाम के रूप में जाना जाता है. कहते हैं जो भी यहां दिल से प्रार्थना करता है सेवा करता है उसकी मनोकामना पूरी होती हैं. नौकरी के अलावा यहां के लोगों ने राजनीति में अभी अपना लोहा मनवाया है. इसी गांव के नर्मदा प्रसाद राय सांसद भी रहे हैं.

सरकारी नौकरी में हैं 9 लोग
शिक्षक प्रभात चौरसिया बताते हैं कि उनके परिवार में 14 लोग हैं, जिसमें से 9 लोग सरकारी नौकरी में हैं. यहां तक की सभी टीचर ही हैं केवल मां और चाची लोग ही नौकरी नहीं करती हैं. बाकी पत्नी भाई चाचा भाभी सभी नौकरी में.

अमित गर्ग बताते हैं कि वह पिछले 16 साल से टीचर हैं उनके परिवार में 9 लोग हैं, जिसमें से पांच लोग नौकरी कर रहे हैं. इसमें तीन लोग आर्मी में है और दो शिक्षक हैं. महादेव की कृपा से सभी लोग नौकरी कर रहे है.

मधुसूदन सोनी का परिवार भी संयुक्त परिवार है. जिसमें वह टीचर है और दो अन्य लोग भी उनके यहां से सरकारी नौकरी में हैं. रज्जन चौबे के परिवार में तीन भाई दो बहन हैं, जिनमें से उनको छोड़कर तीन लोग टीचर हैं. एक पुलिस में है. उनके बड़े भाई शिक्षक हैं. रज्जन अपनी 42 एकड़ जमीन देख रहे हैं. चंद्रप्रभा चौबे रिटायर शिक्षक है लेकिन उनके पति भी टीचर थे. अब तीन बेटियां हैं जो शिक्षक हैं.

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