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सनन्दन उपाध्याय/बलिया: घर-आंगन की शोभा बढ़ाने वाला गेंदा का फूल न केवल सजावट या पूजा-पाठ तक ही सीमित है, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. इसके अनेकों फायदे हैरान करने वाले हैं. यह बेहद खूबसूरत, सुगंधित और आकर्षक होता हैं. इसका इस्तेमाल कर कई बीमारियों से निजात पाया जा सकता है. आगे जानिए…
पीले और नारंगी रंग के ये फूल बेहद सुगंधित, आकर्षक और सेहत के लिए किसी प्राकृतिक दवा से कम नहीं हैं. जी हां त्वचा संबंधी समस्याओं से लेकर पेट तक की गड़बड़ी, दर्द और तनाव तक में गेंदा बेहद लाभकारी और गुणकारी माना जाता है.
आयुर्वेद में गेंदा को एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर बताया गया है. त्वचा पर होने वाले दाने, खुजली, जलन या हल्के घाव पर गेंदा की पंखुड़ियों का लेप लगाने से आराम मिल सकता है. इसके फूलों से तैयार तेल या काढ़ा त्वचा संक्रमण को कम करने में सहायक माना जाता है.
कई हर्बल क्रीम और ऑयमेंट में भी गेंदा का अर्क उपयोग किया जाता है. पेट की समस्याओं में भी गेंदा कारगर माना गया है. गैस, अपच या हल्की पेट दर्द की स्थिति में गेंदा की सूखी पंखुड़ियों से बनी चाय पीना फायदेमंद हो सकता है. यह पाचन तंत्र को शांत करने और सूजन कम करने में मदद करता है. हालांकि, किसी गंभीर समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूरी है.
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, दर्द और सूजन में भी गेंदा उपयोगी है. जोड़ों के दर्द या सूजन वाली जगह पर गेंदा के फूलों से बने तेल की हल्की मालिश करने से राहत मिल सकती है. इसके प्राकृतिक तत्व सूजन कम करने में सहायक माने जाते हैं.
मानसिक तनाव और अनिद्रा में भी गेंदा लाभ पहुंचा सकता है. इसकी हल्की सुगंध मन को शांत करती है और तनाव कम करने में मदद करती है. कुछ लोग गेंदा की चाय या फूलों को कमरे में रखने से सुकून महसूस करते हैं. इसकी पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने की परम्परा चली आ रही है.
डॉ. वंदना तिवारी ने आगे कहा है कि, प्राकृतिक उपचार अपनाते समय सावधानी बेहद जरूरी है. किसी भी तरह की एलर्जी या पुरानी बीमारी होने पर उपयोग से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए. सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो गेंदा का साधारण सा दिखने वाला फूल सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है.