Last Updated:
Currency fair in Indore: इंदौर के गांधी मैदान में लगे मुद्रा मेले में दुनिया भर की करेंसी, खासकर भारत में चलने वाले प्राचीन नोट, अलग-अलग रियासतों की टकसाल के सिक्के, राजा-महाराजाओं के जमाने की करेंसी, उनके हस्ताक्षरित मोहर इत्यादि मिल रही है. क्वाइन कलेक्टर्स के लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं है और यही वजह है कि यहां काफी भीड़ भी देखने को मिल रही है.
जो सिक्के कभी म्यूजियम की शोभा बढ़ाने चाहिए थे वे अब सराफा बाजारों की भट्टी में गलकर केवल धातु बनकर रह गए है. नायाब सिक्कों के शौकीनों को इस बार इंदौर का मुद्रा मेला थोड़ा निराशाजनक लग रहा है क्योंकि उन्हें वह मुश्किल मिलने वाली करेंसी नहीं मिल पा रही है और जो मिल रही है, वह पुरानी तो है पर बहुत ही सामान्य.
इंदौर के गांधी मैदान में लगे मुद्रा मेले में दुनिया भर की करेंसी, खासकर भारत में चलने वाले प्राचीन नोट, अलग-अलग रियासतों की टकसाल के सिक्के, राजा-महाराजाओं के जमाने की करेंसी, उनके हस्ताक्षरित मोहर इत्यादि मिल रही है. क्वाइन कलेक्टर्स के लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं है और यही वजह है कि यहां काफी भीड़ भी देखने को मिल रही है. कई पुराने छोटे-छोटे सिक्के 150 से 200 तक में भी मिल रहे हैं जो सैकड़ों साल पुराने है.
विरासत प्रचलन से बंद हो चुके यह सालों पुरानी सिक्के केवल धातु ना होकर इतिहास का जीवंत सबूत है. लेकिन चांदी के दामों में बढ़ोतरी के चलते कई लोग इन्हें सुनार की दुकान पर गलवा रहे है. मुद्रा विक्रेता आशीष सोनी बताते है कि चांदी की बढ़ती कीमतों की वजह से अब दुर्लभ सिक्के बाजार में कम आ रहे है. जो सिक्के पहले सामान्य खरीदी में मिल जाया करते थे. अब उनकी किल्लत हो गई है. इस बढ़ोतरी की वजह से जो सिक्के पहले 1500 रुपए में मिल जाते थे. वे अब 3000 में बिक रहे है.
एंटीक वैल्यू की पहचान न होने के कारण, जिनके पास महंगे सिक्के हैं वे इन्हें चांदी के दाम देखकर सस्ते में बेच रहे है. मुद्रा विशेषज्ञ ऋषि राज उपाध्याय के अनुसार सिक्कों की असली कीमत उनकी एंटीक वैल्यू में छिपी होती है. लेकिन लोग बिना जाने इन्हें चांदी समझकर उसी भाव में बेच दे रहे हैं, जबकि उन्हें इससे दोगुनी से भी ज्यादा कीमत मिल सकती है.
इंदौर में ब्रिटिश काल के समय में चांदी के सिक्के चलते थे. जिन पर रानी विक्टोरिया की मुहर लगी होती थी. आज भी शहर में कई लोग इन्हें विरासत के रूप में संभाल कर रखते है. हालांकि जिन लोगों के पास ऐसे कई सिक्के थे, उन्होंने चांदी के दामों में बढ़ोतरी के बाद इन्हें सुनारों को बेच दिया.
.