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Medicinal Benefits Of Shalparni: प्रकृति की अनमोल जड़ी-बूटियों में शामिल शालपर्णी आयुर्वेद में विशेष स्थान रखती है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के औषधीय केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. दिनेश राय के अनुसार यह साधारण दिखने वाला पौधा बवासीर, दस्त, पेचिश, पाचन संबंधी समस्याओं और लंबे समय से चल रहे बुखार में लाभकारी माना जाता है. इसकी जड़ और पत्तों में औषधीय गुण पाए जाते हैं, जबकि जड़ का पाउडर विशेष रूप से उपयोग में लाया जाता है. हालांकि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी औषधीय पौधे का सेवन बिना डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य की सलाह के नहीं करना चाहिए, क्योंकि सही मात्रा और विधि से उपयोग करने पर ही इसके सुरक्षित लाभ मिल सकते हैं. रिपोर्ट- अमित कुमार
प्रकृति ने मनुष्य को ऐसी अनगिनत जड़ी-बूटियां दी हैं, जिनका सही उपयोग कई बीमारियों से बचाव में कारगर साबित हो सकता है. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश लोगों को इन औषधीय पौधों की सही पहचान और उपयोग की जानकारी नहीं होती.
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए लोकल 18 की टीम ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के औषधीय केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. दिनेश राय से खास बातचीत की.
इसी क्रम में उन्होंने बताया कि शालपर्णी का पौधा देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन आयुर्वेद में इसका विशेष महत्व है. यह पौधा कई रोगों में लाभ पहुंचाने की क्षमता रखता है और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसे महत्वपूर्ण औषधि माना गया है.
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वैज्ञानिक डॉ. दिनेश राय के अनुसार शालपर्णी के पत्ते और जड़ दोनों ही औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, लेकिन विशेष रूप से इसकी जड़ का पाउडर अधिक उपयोग में लाया जाता है. उन्होंने बताया कि बवासीर, दस्त और पेचिश जैसी समस्याओं में यह काफी लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा मतली, पेट फूलना और पाचन संबंधी दिक्कतों में भी इसका उपयोग किया जाता है.
लंबे समय से बुखार की समस्या हो या शरीर में कमजोरी महसूस हो रही हो, ऐसे मामलों में भी शालपर्णी मददगार साबित हो सकती है. डॉ. राय ने कहा कि डायबिटीज नियंत्रण में सहायक होने के साथ-साथ यह इम्युनिटी मजबूत करने में भी प्रभावी भूमिका निभाती है. इतना ही नहीं, याददाश्त बढ़ाने के लिए भी आयुर्वेद में इसका उल्लेख मिलता है.
डॉ. दिनेश राय ने बताया कि शालपर्णी का उपयोग आदिकाल से वैद्य करते आ रहे हैं और इसे एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी औषधीय पौधे का सेवन बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए. हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए यह जरूरी है कि आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर से परामर्श लेकर ही इसका सेवन शुरू किया जाए.
सही मात्रा और उचित विधि से उपयोग करने पर ही इसके लाभ सुरक्षित और प्रभावी ढंग से मिल सकते हैं. चिकित्सक आपको, किस बीमारी में कैसे, कितनी मात्रा में दवा लेनी है, ये सब जानकारी देंगे. इसलिए अपने मन से इलाज शुरू ना करें और एक्सपर्ट की सलाह पर ही आगे बढ़ें.
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