अश्वगंधा में छिपे हैं कई गुण, गंभीर बीमारियों को करता है ठीक, रिसर्च में मिली खास जानकारी

Last Updated:

Ashwagandha Benefits: रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अश्वगंधा न्यूरॉन्स के रीजनरेशन यानी पुनर्निर्माण में मददगार साबित हो सकती है. प्रोफेसर अभय बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद यदि नियंत्रित मात्रा मे और डॉक्टर की सलाह से अश्वगंधा का सेवन किया जाए तो शरीर बेहतर रिस्पॉन्स देता है. आइए अश्वगंधा के फायदे के बारे में जानते हैं.

गोरखपुर: हमारे बीच कई बार ऐसी चीज मौजूद रहती है, जिसका इस्तेमाल हम नहीं कर पाते, क्योंकि हम उसके फायदों के बारे में पता नहीं होता है, लेकिन वह बेहद कारगर साबित होती हैं. इसी तरह आज हम बताएंगे कि अश्वगंधा खतरनाक बीमारियों में कितना कारगर साबित होता है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग के प्रोफेसर अभय के मुताबिक, स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है.

हेमरेजिक स्ट्रोक और इस्केमिक स्ट्रोक

हेमरेजिक स्ट्रोक में दिमाग की नस फट जाती है और ब्लीडिंग होती है. जबकि इस्केमिक स्ट्रोक में खून का थक्का जमने से ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है. दोनों ही स्थितियों में दिमाग तक ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता, जिससे शरीर का कोई हिस्सा काम करना बंद कर सकता है. कई मामलों में मरीज लकवा का शिकार हो जाता है या जान का भी खतरा बन जाता है.

इलाज और लंबी रिकवरी प्रक्रिया

स्ट्रोक के बाद मरीजों को लंबे समय तक दवाएं दी जाती हैं. साथ ही फिजियोथेरेपी के जरिए शरीर के प्रभावित हिस्से को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की जाती है. फिजियोथेरेपी से न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिकाएं) को दोबारा सक्रिय करने में मदद मिलती है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी धीमी होती है.

अश्वगंधा कैसे कर रही है मदद?

रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अश्वगंधा न्यूरॉन्स के रीजनरेशन यानी पुनर्निर्माण में मददगार साबित हो सकती है. प्रोफेसर अभय बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद यदि नियंत्रित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से अश्वगंधा का सेवन किया जाए, तो शरीर बेहतर रिस्पॉन्स देता है. अश्वगंधा में मौजूद प्राकृतिक तत्व दिमाग की कोशिकाओं को मजबूत करने और तनाव कम करने में सहायक माने जाते हैं. इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधारने और रिकवरी प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिल सकती है.

जरूरी सावधानियां

प्रोफेसर ने बताया कि मरीज के लिए अश्वगंधा कमाल का चीज बनकर सामने आया है. हालांकि स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है और इसका प्राथमिक इलाज डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए. अश्वगंधा का उपयोग सपोर्टिव थेरेपी के रूप में सामने आया है, जो बेहद कमाल है.

तेजी से बढ़ते स्ट्रोक के मामलों के बीच अश्वगंधा उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आई है. सही इलाज, नियमित दवा, फिजियोथेरेपी और संतुलित जीवनशैली के साथ अगर आयुर्वेदिक सपोर्ट जोड़ा जाए, तो रिकवरी की राह आसान हो सकती है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *