क्या गुफा की गहराई में छिपा है कोई बड़ा खतरा?
टीम ने गुफा के उस हिस्से से 25 मीटर का आइस कोर ड्रिल किया जिसे ग्रेट हॉल के नाम से जाना जाता है. (फोटो क्रेडिट: इटकस सी)
कैसे आधुनिक दवाओं को मात दे रहा है यह सुपरबग?
वैज्ञानिकों ने इस बैक्टीरिया पर 10 अलग-अलग क्लास की 28 एंटीबायोटिक दवाओं का टेस्ट किया. इनमें से 10 ऐसी दवाएं थीं, जिनका उपयोग आज हम गंभीर इन्फेक्शन्स को ठीक करने के लिए करते हैं. टेस्ट में पता चला कि यह प्राचीन सुपरबग ‘रिफैम्पिसिन’, ‘वैंकोमाइसिन’ और ‘सिप्रोफ्लोक्सासिन’ जैसी दवाओं के खिलाफ पूरी तरह सुरक्षित है. ये वो दवाएं हैं जो टीबी (Tuberculosis) और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के इलाज में रामबाण मानी जाती हैं. इसके अलावा क्लिंडामाइसिन और मेट्रोनिडाजोल जैसी दवाएं भी इस पर असर नहीं कर पाईं. यह पहली बार है जब साइक्रोबैक्टेर की किसी प्रजाति में इतनी ज्यादा रेजिस्टेंस पावर देखी गई है.
क्या ग्लोबल वार्मिंग ला सकती है नई महामारी?
आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग की मार झेल रही है और यही सबसे बड़ी चिंता की वजह है. डॉक्टर पुर्कारिया ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे दुनिया भर की बर्फ पिघल रही है, वैसे-वैसे हजारों सालों से दबे हुए सूक्ष्मजीव बाहर आ सकते हैं. अगर ये प्राचीन बैक्टीरिया आधुनिक बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं, तो ये अपने ‘रेजिस्टेंस जीन’ उन्हें ट्रांसफर कर सकते हैं. इससे दुनिया में ऐसे सुपरबग्स फैल सकते हैं, जिनका इलाज करना डॉक्टरों के लिए नामुमकिन हो जाएगा. यह स्थिति भविष्य में एक और बड़ी स्वास्थ्य इमरजेंसी का कारण बन सकती है.
क्या यह खोज मानवता के लिए वरदान साबित होगी?
हैरानी की बात यह है कि यह खतरनाक बैक्टीरिया हमारे काम भी आ सकता है. रिसर्च के दौरान यह देखा गया कि साइक्रोबैक्टेर खुद कुछ ऐसे एंजाइम और कंपाउंड्स पैदा करता है, जो दूसरे सुपरबग्स को मार सकते हैं. इसका मतलब है कि इसकी मदद से हम भविष्य के लिए नई और ज्यादा ताकतवर एंटीबायोटिक दवाएं बना सकते हैं. यह बैक्टीरिया बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि लैब में इस पर काम करते समय बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि यह गलती से भी बाहर न फैल सके.