आयुर्वेद में जड़ी-बूटी का सदियों से बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है. आज के दौर में जहां लोग तुरंत राहत के लिए अंग्रेजी दवाओं की ओर भागते हैं, वहीं आयुर्वेद में एक ऐसी औषधि है जिसे संजीवनी का छोटा भाई कहा जाए तो गलत नहीं होगा. बलिया की अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना उपाध्याय के अनुसार, चिरायता (Chirata) एक ऐसा जादुई पौधा है जो टाइफाइड जैसे जिद्दी बुखार से लेकर शुगर और लिवर की गंभीर समस्याओं तक में तुरंत आराम पहुंचाता है. खून साफ करने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में इसका कोई मुकाबला नहीं है. आइए जानते हैं चिरायता का काढ़ा कैसे शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है और इसका सेवन कैसे करना चाहिए.