जबलपुर. राइट टाउन इलाके में रहने वाली रिटायर्ड नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव (81) का इलाज के दौरान निधन हो गया. कुछ दिन पहले तबियत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरी निगरानी के बावजूद उनकी जान नहीं बच पाई. उनसे जुड़े कई मामले जांच के दायरे में हैं. डॉ. हेमलता के निधन की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस अस्पताल पहुंची और उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया. परिजनों को सूचना दे दी गई है और उनकी छोटी बहन के आने पर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा. उनके निधन के बाद संपत्ति विवाद, कथित अपहरण और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस अब व्यापक जांच कर रही है.
दरअसल, कुछ दिनों पहले तबियत बिगड़ने पर डॉ. हेमलता को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, लेकिन किसी भी अस्पताल में उन्हें स्थिर स्थिति में नहीं रखा जा सका. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की शिकायत और कलेक्टर के निर्देश पर अंततः उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लाया गया था, जहाँ पांच डॉक्टरों की टीम उनकी देखरेख में इलाज कर रही थी. बावजूद इसके अंतिम समय में उनकी हालत गंभीर बनी रही और मौत हो गई. प्रशासन ने बताया है कि अब उनके स्वास्थ्य से जुड़े रिकॉर्ड, इलाज का विवरण और मृत्यु के कारणों की फोरेंसिक रिपोर्ट की भी समीक्षा की जा रही है.
संपत्ति विवाद और दानपत्र का मुद्दा
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव लंबे समय से संपत्ति विवाद को लेकर सुर्खियों में रही थीं. राइट टाउन में उनके पास लगभग 25000 स्क्वायर फीट जमीन थी, जिसमें से करीब 11000 स्क्वायर फीट जमीन का दानपत्र डॉक्टर सुमित जैन और उनकी पत्नी के नाम दर्ज था. विवाद के कारण प्रशासन ने संपत्ति के दावे और वैधानिक दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए थे. कहा जाता है कि शेष संपत्ति कोई धार्मिक संस्था को दान करने की बात भी सामने आई थी. विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे विवाद बड़े अचल संपत्ति मामलों में आम हैं, लेकिन 40–50 करोड़ रुपये की संपत्ति होने के कारण यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर चर्चा में रहा.
इकलौते बेटे की हो गई थी मौत, एक माह पहले पति भी चल बसे
डॉ. हेमलता के बड़े बेटे डॉ. रचित श्रीवास्तव की चार साल पहले मृत्यु हो जाने के बाद उनका जीवन और अधिक अकेला हुआ. इसके बाद एक माह पहले उनके पति का भी निधन हो गया, जिससे वह पूरी तरह अकेली रह गईं. ऐसे में संपत्ति विवाद उनके लिए मानसिक और भावनात्मक दोनों स्तर पर भारी साबित हुआ. विवाद को लेकर राजस्व न्यायालय में भी कई याचिकाएँ चल रही थीं, जिनमें दानपत्र की वैधता और अधिकारों की प्रक्रिया शामिल है.
कथित अपहरण का मामला और जांच
हाल ही में मीडिया में वायरल एक वीडियो ने जबलपुर के चिकित्सक जगत और स्थानीय प्रशासन की नीतियों पर भी ध्यान खींचा. 27 जनवरी को सामने आए एक वायरल वीडियो में कुछ लोग उन्हें जबरन एक सफेद कार में बैठाकर ले जाते हुए दिखाई दिए थे, जिससे यह दावा किया गया कि उनका अपहरण किया गया था. इस घटना के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी. मदन महल थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी थी.
बहन ने दी सफाई, कहा- अपहरण का दावा फर्जी
वीडियो के सामने आने से चिकित्सक, समाजसेवी और स्थानीय लोग असमंजस में थे. विवाद बढ़ने के कारण कई डॉक्टर और सामाजिक समूहों ने विरोध भी जताया. हालांकि, डॉ. हेमलता की बहन कनकलता ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वीडियो में दिखाया गया दृश्य अपहरण नहीं था और उन्हें उनकी इच्छा के अनुसार किसी मंदिर या उपचार स्थल पर ले जाया जा रहा था. इस बीच गायत्री परिवार के ट्रस्टी ने भी कहा कि वे उन्हें चिकित्सा सहायता के लिए ले जा रहे थे और अपहरण का दावा फर्जी है.
प्रशासन और पुलिस की भूमिका
जबलपुर एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किये जा रहे हैं और दानपत्र, जमीन के दस्तावेज, अपहरण के दावे और अन्य वैधानिक पहलुओं की जांच जारी है. पुलिस का कहना है कि कार्यालय रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और गवाहों के बयान से जल्द मामला स्पष्ट होगा. संभव है कि अब डॉ. हेमलता की मौत के बाद यह पूरा घटनाक्रम एक साथ न्यायिक प्रक्रिया में आए और प्रशासन पूरी सच्चाई उजागर करे. हालांकि, प्रशासन ने कहा है कि अभी तक मौत के कारणों को लेकर कोई संदेह नहीं है और न ही किसी अपराधिक गतिविधि के संकेत मिले हैं, लेकिन संपत्ति हस्तांतरण, दानपत्र की वैधता और कथित अपहरण के दावों की जांच जारी है. राजस्व न्यायालय में चल रही कार्यवाही में भी यह सभी पहलू शामिल हैं और जल्द ही सुनवाई में दस्तावेजी पुख्ता साक्ष्य पेश किये जाएंगे.
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