Agri: एक खेत, दो फसल, किसान का अनोखा प्रयोग, 3 साल की मेहनत; सालों-साल कमाई

Last Updated:

Intercropping: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बड़ागांव निवासी प्रगतिशील किसान प्रेम शर्मा ने एक ही खेत में गेहूं और अमरूद की खेती कर आय का नया मॉडल पेश किया है. जहां वर्तमान में गेहूं से उन्हें नियमित फसल मिल रही है, वहीं तीन साल में तैयार होने वाला अमरूद का बाग भविष्य में लंबे समय तक स्थायी और लगातार आय का स्रोत बनेगा.

रिपोर्टर आशीष पांडे, 

Intercropping: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक ही खेत में दो फसलों की खेती कर प्रगतिशील किसान प्रेम शर्मा ने आय का नया मॉडल प्रस्तुत किया है. बड़ागांव के इस किसान ने गेहूं के साथ अमरूद की बागवानी शुरू की है, जो तीन साल में पूरी तरह तैयार होगी. उनका कहना है कि एक बार अमरूद का बाग तैयार हो जाने के बाद यह कभी न खत्म होने वाला खजाना साबित होगा और लंबे समय तक नियमित आमदनी देता रहेगा. वर्तमान में उसी खेत में गेहूं की फसल ली जा रही है, जिससे उन्हें एक साथ दोहरा लाभ मिल रहा है.

प्रेम शर्मा बड़ागांव में अपने खेत में करीब 300 अमरूद के पौधे लगाए हैं. अमरूद का पौधा लगभग तीन साल में फल देना शुरू करता है. इस दौरान खाली पड़ी जमीन को बेकार न छोड़ते हुए वे गेहूं की खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक बाग पूरी तरह विकसित नहीं हो जाता, तब तक खेत में मौसमी फसलें बोई जाती रहेंगी. इससे जमीन का बेहतर उपयोग होता है और शुरुआती वर्षों में भी आय बनी रहती है. वे बताते हैं कि अमरूद की खेती में शुरुआती निवेश करना पड़ता है, लेकिन एक बार पौधे स्थापित हो जाएं तो बार-बार रोपाई की जरूरत नहीं होती. सही देखभाल, सिंचाई और खाद प्रबंधन के साथ यह बाग कई वर्षों तक उत्पादन देता है. तीन साल के इंतजार के बाद अमरूद की नियमित पैदावार शुरू हो जाएगी, जिससे स्थायी आय का स्रोत तैयार होगा.

बागवानी की खेती
प्रगतिशील किसान का कहना है कि बागवानी की खेती पूरी तरह बाजार और मौसम पर निर्भर करती है. यदि मौसम अनुकूल रहे और बाजार में दाम अच्छे मिलें तो आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. सामान्य परिस्थितियों में एक बीघा बाग से लगभग एक लाख रुपये तक की आय होना आम बात है. वे मानते हैं कि एक बीघा में एक लाख रुपये की आय न तो बहुत ज्यादा है और न ही कम, बल्कि बागवानी के हिसाब से यह सामान्य और संतोषजनक आय है.

उनका मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को जोड़कर किसान जोखिम कम कर सकते हैं. गेहूं जैसी फसल से हर वर्ष आमदनी मिलती रहेगी, वहीं अमरूद का बाग दीर्घकालिक लाभ देगा. इस तरह एक ही खेत से अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार की आय सुनिश्चित की जा सकती है.

प्रेम शर्मा का यह प्रयोग क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है. नई तकनीक और योजनाबद्ध खेती के माध्यम से वे यह संदेश दे रहे हैं कि यदि किसान सोच में बदलाव लाएं और जमीन का बहुदेशीय उपयोग करें तो खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है. तीन साल बाद तैयार होने वाला अमरूद का बाग उनके लिए स्थायी संपत्ति साबित होगा, जो लंबे समय तक निरंतर आय देता रहेगा.

About the Author

Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *