Last Updated:
BRICS NATO News: रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने इस बात से इनकार किया कि ब्रिक्स आर्थिक ब्लॉक को सैन्य गठबंधन में बदलना चाहता है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स न तो कोई सैन्य गठबंधन है और न ही आपसी मिलिट्री मदद की जिम्मेदारियों वाला कोई कलेक्टिव सुरक्षा संगठन.
ब्रिक्स को 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने बनाया था. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. रूस ने दुनिया के सामने स्थिति साफ कर दी है कि तेजी से बढ़ता हुआ ‘ब्रिक्स’ (BRICS) समूह पश्चिम के नाटो (NATO) की तरह कोई सैन्य गठबंधन नहीं बनने जा रहा है. रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव (Sergei Ryabkov) ने शनिवार को उन अटकलों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि ब्रिक्स को एक मिलिट्री ब्लॉक में बदलने की तैयारी चल रही है. तास (TASS) न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का फोकस सिर्फ आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग पर है, न कि हथियार उठाने पर.
रयाबकोव ने ब्रिक्स की मूल भावना को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स न तो कोई सैन्य गठबंधन है और न ही यह कोई ऐसा समूह है जहां सदस्यों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर हो.’ रयाबकोव ने जोर देकर कहा कि इस ब्लॉक को कभी भी मिलिट्री नजरिए से नहीं सोचा गया था और भविष्य में भी इसे उस दिशा में ले जाने की कोई योजना नहीं है. ब्रिक्स के पोर्टफोलियो में मिलिट्री एक्सरसाइज या हथियार कंट्रोल शामिल नहीं हैं.
‘विल फॉर पीस 2026’ ब्रिक्स का हिस्सा नहीं
हाल ही में 9 से 16 जनवरी 2026 के बीच दक्षिण अफ्रीका के पास हुए ‘विल फॉर पीस 2026’ (Will for Peace 2026) नौसैनिक अभ्यास को लेकर भी उन्होंने सफाई दी. इस ड्रिल में चीन, ईरान और रूस ने हिस्सा लिया था. रयाबकोव ने साफ किया कि यह ब्रिक्स का इवेंट नहीं था. इसमें शामिल देशों ने अपनी राष्ट्रीय हैसियत से भागीदारी की थी. इसे ब्रिक्स के बैनर तले नहीं देखा जाना चाहिए.
टैंकर सुरक्षा पर हाथ खड़े
जब उनसे पूछा गया कि क्या ब्रिक्स अपने सदस्यों के तेल टैंकरों को हमलों से बचा सकता है, तो उन्होंने यथार्थवादी जवाब दिया. उन्होंने माना कि ब्लॉक के पास मिलिट्री सुरक्षा देने की क्षमता नहीं है. ब्रिक्स का काम लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाना और पश्चिमी प्रतिबंधों (Sanctions) से बचने के लिए आर्थिक सुरक्षा देना है. फिजिकल सुरक्षा के लिए दूसरे तरीके अपनाने होंगे.
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत?
ब्रिक्स के नए सदस्य ईरान (Iran) को लेकर रूस और चीन एक बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. रयाबकोव ने कहा कि रूस और चीन तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बातचीत के लिए सही माहौल बनाने पर काम कर रहे हैं. ईरान अमेरिकियों के साथ अप्रत्यक्ष रूप से, खासकर अरब देशों की मध्यस्थता के जरिए जो बातचीत कर रहा है, उसे ब्रिक्स का समर्थन जारी रहेगा.
About the Author
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
.