मंत्रालय में हाई सिक्योरिटी के बीच योगेन्द्र सिंह चौहान नाम के एक युवक ने खुद को आईएएस अफसर बताते हुए अपना तबादला कराने के लिए जीएडी के अफसरों से मुलाकात कर ली। जीएडी के अफसरों को सवाल जवाब के दौरान उसकी हरकतें देख समझ में आ गया कि वह फर्जी आईएएस बनकर आया है। इसके बाद उसे मंत्रालय सुरक्षा बल के हवाले कर दिया गया। जिसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने मंत्रालय के जीएडी शाखा तक पहुंचे इस फर्जी आईएएस अधिकारी से पूछताछ की। कटेसरिया ने बताया कि योगेंद्र सिंह चौहान नाम के व्यक्ति ने खुद को 2019 बैच का आईएएस अफसर बताते हुए कहा कि जीएडी उसकी पदस्थापना करने के बाद भूल गया है। इसलिए वह अपना ट्रांसफर कराने के लिए यहां आया है। योगेंद्र ने पूछताछ में खुद को एक्टिव अफसर बताते हुए कहा कि वह पूर्व इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह के साथ काम कर चुका है और वह उसे बहुत पसंद करते थे। साथ ही उसने कहा कि इंदौर के पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह भी उसे जानते हैं और वह उनसे बात भी करा सकता है। उसने जीएडी अफसरों से कहा कि जीएडी उसकी पदस्थापना के आदेश जारी करना भूल गया है। इसलिए वह यहां अपनी पोस्टिंग के लिए आया है। जब अफसरों को इस बात का भरोसा हो गया कि वह फर्जी आईएएस है तो उसे मंत्रालय सुरक्षा अधिकारियों के हवाले कर दिया। पूछताछ के बाद परिजन के हवाले कर दिया गया मंत्रालय के सुरक्षा अधिकारी अविनाश शर्मा ने कहा कि फर्जी आईएएस बनकर आए योगेंद्र सिंह चौहान को पूछताछ के बाद उसके परिजन को बुलाकर उनके हवाले कर दिया गया है। शर्मा के अनुसार, वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं लग रहा था। ज्यादा पढ़ाई के कारण उसकी दशा बिगड़ी लग रही थी। इसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है। .