डेथ कैप मशरूम से अमेरिका में फैली खतरनाक बीमारी, लिवर ट्रांसप्लांट कराने तक की आई नौबत, जानिए हमारे देश में कितना खतरा

Mushroom Poisoning : दुनिया के सबसे विकसित देशों में शुमार अमेरिका इस वक्त एक कुदरती ‘साइलेंट किलर’ के खौफ में है. कैलिफोर्निया में जंगली मशरूम ‘डेथ कैप’ (Amanita phalloides) ने ऐसा कहर बरपाया है जिसे स्वास्थ्य अधिकारियों ने “अभूतपूर्व” (Unprecedented) करार दिया है. Guardian के रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच यहाँ 4 मौतें और 40 लोग अस्पताल पहुँच चुके हैं, जिनमें से कइयों के लिवर ट्रांसप्लांट करने की नौबत आ गई है. लेकिन यह खतरा सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है. भारत के पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर में भी यह मशरूम हर साल कई जिंदगियां लील रहा है.

क्या है ये ‘डेथ कैप’ का चक्कर?
इसे वैज्ञानिक भाषा में तो ‘अमानिता फालोइड्स’ कहते हैं, लेकिन इसका काम इसके नाम जैसा ही है—मौत का ढक्कन. यह मशरूम ओक के पेड़ों के नीचे उगता है और देखने में बिल्कुल वैसा ही लगता है जैसा हम बाजार से खरीदकर खाते हैं.

सबसे डरावनी बात यह है कि अगर कोई हेल्‍दी मजबूत इंसान इसका आधा हिस्सा भी खा ले तो मौत के मुंह में जा सकता है. और हां, अगर आप सोच रहे हैं कि इसे उबालने, तलने या सुखाने से इसका जहर खत्म हो जाएगा, तो आप गलत हैं. इसका जहर किसी भी हाल में खत्‍म नहीं होता है.

कैलिफोर्निया में इमरजेंसी जैसे हालात: क्यों फैल रही बीमारी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल हुई रिकॉर्ड बारिश (Wet Winter) ने जंगलों में इसकी बाढ़ ला दी है. ऐसे में मेक्सिको और ओक्साका से आए प्रवासी मजदूर इसे अपने देश के ‘खाद्य मशरूम’ जैसा समझकर खा रहे हैं. लोग मशरूम पहचानने के लिए AI मोबाइल ऐप्स का सहारा ले रहे हैं, जो अक्सर ‘डेथ कैप’ को ‘पफबॉल’ या अन्य खाने योग्य मशरूम बताकर गलत जानकारी दे रहे हैं.

नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच यहाँ 4 मौतें और 40 लोग अस्पताल पहुँच चुके हैं, जिनमें से कइयों के लिवर ट्रांसप्लांट करने की नौबत आ गई है.

भारत में भी खतरा-
अगर आपको लग रहा है कि यह सिर्फ अमेरिका की बात है, तो संभल जाइए. पिछले साल बरसात के दिनों में उत्तराखंड के रानीखेत (कुमाऊं) में भी ऐसी ही घटना हुई थी, जहां जंगली मशरूम खाने से 4 महिलाओं की जान चली गई थी.

उनका इलाज करने वाले हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल के डॉ. अरुण जोशी ने बताया था कि यह जहर शरीर के अंदर जाकर कैसे तबाही मचाता है. उन्होंने बताया कि इसे खाने के बाद रातभर मरीज को जबरदस्त उल्टी और दस्त होते हैं. धीरे-धीरे फेफड़ों में इन्फेक्शन हो जाता है और सांस लेने का सिस्टम (रेस्पिरेटरी सिस्टम) पूरी तरह फेल हो जाता है. अंत में लिवर जवाब दे देता है और इंसान की मौत हो जाती है.

पूर्वोत्तर भारत (Northeast) के राज्यों से भी हर साल ऐसी खबरें आती रहती हैं, जहां अनजाने में लोग जंगल से मशरूम तोड़कर घर में सब्जी बना लेते हैं और फिर पूरा परिवार अस्पताल पहुंच जाता है.

कैसे पहचानें इस ‘मौत’ के मशरूम को? जानकारों का कहना है कि इसे पहचानना बहुत मुश्किल है, लेकिन कुछ बातें ध्यान रखें:

-इसका ऊपरी हिस्सा हल्का पीला, हरा या भूरा हो सकता है.
-इसके नीचे की धारियां (Gills) एकदम सफेद होती हैं.
-इसके तने के सबसे नीचे एक ‘कप’ जैसा हिस्सा बना होता है.
-इसे खाने के 6 से 24 घंटे तक शायद आपको कुछ महसूस न हो, लेकिन अंदर ही अंदर यह लिवर को काटना शुरू कर देता है.

बचाव ही सबसे बड़ा इलाज- एक्सपर्ट रूडी डियाज़ कहते हैं कि “मशरूम चुनना कोई बच्चों का खेल नहीं है, इसमें सालों का अनुभव चाहिए.” इसलिए अगर आप मशरूम के शौकीन हैं, तो इन बातों का गांठ बांध लें:

-जंगल या खेत में उगने वाले किसी भी मशरूम को हाथ भी न लगाएं, खाना तो दूर की बात है.
-हमेशा भरोसेमंद दुकान या स्टोर से ही मशरूम खरीदें.
-अगर मशरूम खाने के बाद पेट में हल्का सा भी दर्द या उल्टी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास भागें.

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