यूरोपीय फुटबॉल में पिछले कुछ वर्षों से चल रहे सुपर लीग विवाद का औपचारिक अध्याय अब बंद होता नजर आ रहा है। बुधवार को रियल मैड्रिड और यूरोपीय फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था यूईएफए के बीच हुए समझौते ने इस विभाजनकारी परियोजना के अंत के संकेत दे दिए। यह समझौता ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही बार्सिलोना ने भी सुपर लीग से खुद को अलग कर लिया था, जिससे रियल मैड्रिड और उसके अध्यक्ष फ्लोरेंटिनो पेरेज़ और अधिक अलग-थलग पड़ गए थे।
बता दें कि भले ही दो साल से अधिक समय पहले यूरोपीय न्यायालय ने यूईएफए के खिलाफ रियल मैड्रिड और बार्सिलोना के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन इसके बावजूद कोई भी नया क्लब सार्वजनिक रूप से सुपर लीग से जुड़ने आगे नहीं आया। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के पास आगे बढ़ने का कोई स्पष्ट रास्ता भी नहीं था, जिससे इसका भविष्य पहले से ही अनिश्चित बना हुआ था।
रियल मैड्रिड, यूईएफए और यूरोपीय फुटबॉल क्लबों के प्रभावशाली संगठन के बीच जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि कुछ मूल सिद्धांतों पर सहमति बनी है, जो आपसी कानूनी विवादों के समाधान में भी मदद करेंगे। यह घोषणा ब्रसेल्स में यूईएफए की वार्षिक कांग्रेस से ठीक पहले हुई, जहां 55 सदस्य देशों के फुटबॉल संघों के प्रतिनिधि मौजूद हैं।
गौरतलब है कि बयान में बीते कई महीनों से यूरोपीय फुटबॉल के हित में चली बातचीत का जिक्र किया गया है, जिसमें भविष्य में तकनीक के जरिए प्रशंसकों के अनुभव को बेहतर बनाने को एक अहम सिद्धांत बताया गया है। साल 2021 में रियल मैड्रिड 12 बड़े स्पेनिश, इंग्लिश और इतालवी क्लबों के समूह का नेतृत्व कर रहा था, जिन्होंने यूईएफए के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अलग सुपर लीग शुरू करने की कोशिश की थी।
हालांकि, इंग्लैंड में प्रशंसकों और सरकार के तीखे विरोध के चलते यह योजना 48 घंटे के भीतर ही बिखर गई थी। उस समय पारंपरिक यूरोपीय फुटबॉल ढांचे की रक्षा के लिए संभावित कानून बनाने की चेतावनी भी दी गई थी, जिसने इस परियोजना को और कमजोर कर दिया था।
मौजूदा समझौते को रियल मैड्रिड के लिए यूरोपीय क्लबों के मुख्य समूह में वापसी का रास्ता खोलने वाला कदम माना जा रहा है। बता दें कि सुपर लीग से अलग होने के बाद यह संगठन और मजबूत हुआ है और अब इसके करीब 800 सदस्य क्लब हैं, जबकि केवल रियल मैड्रिड और बार्सिलोना ही इससे बाहर हैं।
चैंपियंस लीग की बात करें तो रियल मैड्रिड और बार्सिलोना लगातार इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते रहे हैं और हर सीजन यूईएफए से 100 मिलियन यूरो से अधिक की इनामी राशि अर्जित करते रहे हैं। यह वही प्रतियोगिता है, जिसके मौजूदा स्वरूप को तय करने में इन क्लबों की भी अहम भूमिका रही है।
गौरतलब है कि 1992 से चैंपियंस लीग के विकास के दौरान बड़े क्लब समय-समय पर अधिक राजस्व और मैचों की मांग करते रहे हैं और परोक्ष रूप से अलग लीग बनाने का दबाव भी बनाते रहे हैं। लेकिन पांच साल पहले जब यह खतरा वास्तविक रूप में सामने आया, तब यूईएफए, प्रशंसक संगठनों और नीति-निर्माताओं के संयुक्त प्रयासों से इसे रोका गया, ताकि छोटे और कम संसाधन वाले देशों के क्लबों के लिए भी योग्यता के आधार पर दरवाजे खुले रह सकें।
मौजूद हालात में यूरोपीय फुटबॉल की राजनीति एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां क्लबों की भूमिका और प्रभाव पहले से अधिक बढ़ा है। यूईएफए के साथ संयुक्त वाणिज्यिक उपक्रम यूसी3 के जरिए भविष्य में चैंपियंस लीग के शेड्यूल, प्रारूप और प्रसारण समझौतों में बदलाव की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं, जो आने वाले समय में यूरोपीय फुटबॉल की दिशा तय कर सकती हैं।
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