अब मेरी बेटी तेरे हवाले…6 महीने की उम्र में हुआ था कैंसर, नर्मदा में डुबकी लगाते हुआ चमत्कार!

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Cancer Survivior Girl Story: चार साल की नंदिनी अपने दादा-दादी के साथ 3600 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा पैदल कर रही है और उसकी कहानी आस्था और हिम्मत की मिसाल बन गई है. सिर्फ छह महीने की उम्र में कैंसर से जूझ चुकी इस बच्ची के इलाज में परिवार ने तीन लाख रुपये खर्च किए थे. परिवार का दावा है कि नेमावर में मां नर्मदा स्नान के बाद बच्ची की हालत में सुधार हुआ और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई. अब परिवार रोज 12 से 15 किलोमीटर पैदल नर्मदा तट के साथ चल रहा है और आधी यात्रा पूरी कर चुका है. यह कहानी मध्य प्रदेश में नर्मदा परिक्रमा और धार्मिक आस्था से जुड़ी एक भावुक और प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है.

Ajab Gajab News: मां नर्मदा को मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की जीवनदायनी कहा जाता है. मान्यता है कि गंगा में स्नान से जो पुण्य मिलता है, उससे अधिक पुण्य नर्मदा के दर्शन से मिल जाता है. यही वजह है कि हर साल हजारों श्रद्धालु नर्मदा की 3600 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करते हैं. इन दिनों एक खास परिक्रमा चर्चा में है. चार साल की नन्ही नंदिनी अपने दादा-दादी के साथ पैदल नर्मदा परिक्रमा कर रही है. उसकी कहानी सुनकर हर कोई हैरान है.

6 महीने की उम्र में मिली थी कैंसर की खबर
देवास जिले के सतवास तहसील के ग्राम घुड़िया निवासी राधेलाल लोंगरे अपनी पत्नी प्रसादी लोंगरे और पोती नंदिनी के साथ 25 नवंबर 2025 को हंडिया गांव से परिक्रमा पर निकले थे. राधेलाल बताते हैं कि जब नंदिनी सिर्फ 6 महीने की थी, तब उसके गले में सूजन आई. हरदा, इंदौर और भोपाल में इलाज कराया गया. बाद में मुंबई से आई रिपोर्ट में कैंसर की पुष्टि हुई. करीब तीन लाख रुपये इलाज में खर्च हो गए. मजदूरी कर पैसे जुटाए, लेकिन डॉक्टरों ने उम्मीद कम ही बताई.

नेमावर में स्नान और मन्नत
जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब राधेलाल नंदिनी को नेमावर ले गए. वहां मां नर्मदा में स्नान कराया और मन ही मन कहा कि अब ये बेटी तेरे हवाले. उन्होंने मन्नत मांगी कि अगर बच्ची ठीक हो गई तो उसे साथ लेकर नर्मदा परिक्रमा करेंगे. उनका दावा है कि स्नान के कुछ महीनों बाद बच्ची की हालत में सुधार होने लगा. रिपोर्ट सामान्य आई और नंदिनी पूरी तरह स्वस्थ हो गई.

रोज 12-15 किलोमीटर पैदल सफर
आज नंदिनी चार साल की है और पूरी तरह स्वस्थ है. दादा-दादी के साथ रोज 12 से 15 किलोमीटर पैदल चलती है. जब थक जाती है तो दादा उसे कंधे पर उठा लेते हैं. शाम को किसी आश्रम या नर्मदा तट पर विश्राम करते हैं. राधेलाल कहते हैं कि मां नर्मदा के किनारे चलते हुए अलग ही सुकून मिलता है. मां कभी भूखा नहीं सुलाती.

आस्था और हिम्मत की मिसाल
नंदिनी की परिक्रमा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और हिम्मत की कहानी बन गई है. कम उम्र में गंभीर बीमारी से जूझकर अब वह 3600 किलोमीटर की यात्रा कर रही है. यह कहानी बताती है कि विश्वास और साहस मिल जाएं तो मुश्किल रास्ते भी आसान लगने लगते हैं.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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