विजया एकादशी 13 फरवरी को: बाधाएं दूर करने की कामना से किया जाता है विजया एकादशी व्रत, जानिए इस दिन कौन-कौन से शुभ काम करें

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5 घंटे पहले

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फाल्गुन कृष्णपक्ष की एकादशी 13 फरवरी को है, इसे विजया एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से मुश्किल कामों में और शत्रुओं पर विजय यानी सफलता मिलती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पौराणिक कथा है कि ये व्रत श्रीराम ने भी किया था। विजया एकादशी व्रत रखने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और कठिन से कठिन कार्य भी सफल हो जाते हैं। जो व्यक्ति भक्ति और नियमों के साथ भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसे विशेष कृपा मिलती है। इस दिन व्रत रखने से शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

ऐसे कर सकते हैं एकादशी व्रत

विजया एकादशी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें।

सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु के सामने एकादशी व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। संकल्प लेते समय भगवान से व्रत और पूजा को सफल बनाने की प्रार्थना करनी चाहिए।

भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। पूजा के बाद दिनभर निराहार रहें, अन्न का सेवन न करें। जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार कर सकते हैं, फलों के रस और दूध का सेवन कर सकते हैं।

सुबह तुलसी और पीपल के पेड़ में जल अर्पित कर उनकी परिक्रमा करनी चाहिए। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

विजया एकादशी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा की स्थापना करें। भगवान का आवाहन करें। जल-दूध चढ़ाकर भगवान को स्नान कराएं। इसके बाद धूप, दीप, चंदन, फल, फूल और तुलसी दल से भगवान श्रीहरि की पूजा करें। पूजा में तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जप करें।

अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर भी सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन करें। इसके बाद जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और फिर खुद भोजन ग्रहण करें। इस प्रकार एकादशी व्रत पूरा होता है।

एकादशी पर कर सकते हैं ये शुभ काम

एकादशी पर भगवान शिव की भी पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

किसी मंदिर में तेल-घी, कुमकुम, गुलाल, अबीर, हार-फूल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री का दान करें।

गायों को हरी घास खिलाएं। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें।

हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा के साथ ही सुंदर कांड का भी पाठ करें। आप चाहें तो राम नाम का जप भी करना चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं और कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप 108 बार करें।

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