क्या ट्यूमर को बढ़ने से रोक सकता है सिस्टमेटिक हाइपोक्सिया? भारतीय रिसर्चर की स्टडी में खुलासा

Last Updated:

Systemic Hypoxia and Tumor Growth: एक नई रिसर्च में पता चला है कि सिस्टमेटिक हाइपोक्सिया ट्यूमर की ग्रोथ को दबाने में मदद कर सकता है. सिस्टमेटिक हाइपोक्सिया वह कंडीशन होती है, जब शरीर में कंट्रोल तरीके से ऑक्सीजन की कमी कर दी जाती है. इससे ट्यूमर बढ़ने से रुक सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया सैन फ्रांसिस्को में रिसर्च स्कॉलर आयुष मिधा ने कई इंस्टीट्यूट और शोधकर्ताओं की मदद से यह स्टडी की है. आयुष ने इस रिसर्च से जुड़े प्री-प्रिंट X पर शेयर किए हैं.

क्या सिस्टमेटिक हाइपोक्सिया से ट्यूमर की ग्रोथ को रोका जा सकता है? शोधकर्ताओं ने इस सवाल की इन्वेस्टिगेशन दो अलग-अलग ऑब्जर्वेशन के आधार पर शुरू की. पहला ऑब्जर्वेशन यह था कि ट्यूमर-लोकलाइज्ड हाइपोक्सिया खराब प्रोग्नोसिस से जुड़ा है. दूसरा जो लोग ऊंचाई पर रहते हैं, वहां हवा पतली होती है. ऐसे लोगों में कैंसर की मृत्यु दर कम होती है.

इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि सिस्टमेटिक हाइपोक्सिया ट्यूमर प्रोग्रेशन को कैसे अफेक्ट करता है, इसलिए रिसर्चर्स ने सॉलिड ट्यूमर वाले चूहों को अलग-अलग ऑक्सीजन लेवल के एक्सपोजर में रखा: 21% (नॉर्मॉक्सिया), 11% (मॉडरेट हाइपोक्सिया) और 8% O2 (हाइपोक्सिया). स्टडी में देखा गया कि हाइपोक्सिक चूहों में ट्यूमर बहुत कम बढ़े.

हाइपोक्सिया अलग-अलग कैंसर सेल लाइन पर कैसे असर डालेगा? यह जानने के लिए रिसर्चर्स ने जॉनी यू और हानी गुडार्जी के बनाए GENEVA नाम के एक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया. इसमें नॉर्मोक्सिक और हाइपोक्सिक चूहों में 20 पूल्ड कैंसर सेल लाइन इम्प्लांट कीं और 8 दिनों के बाद सिंगल-सेल RNA-सीक्वेंसिंग की.

Add News18 as
Preferred Source on Google

GENEVA डाटा का इस्तेमाल करके शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ सेल लाइन हाइपोक्सिया में दूसरों से आगे निकल गईं और उन सेल लाइन ने नए प्यूरीन न्यूक्लियोटाइड के सिंथेसिस में शामिल जीन को एक्टिवेट किया.

ट्रांसक्रिप्टोमिक्स डाटा के साथ रिसर्चर्स ने देखा कि हाइपोक्सिक चूहों में छोटे ट्यूमर में प्यूरीन न्यूक्लियोटाइड का लेवल कम था, जो कैंसर सेल के बढ़ने में कमी ला सकता है.

न्यूक्लियोटाइड दो सोर्स से आ सकते हैं: डी नोवो सिंथेसिस, जिसमें बहुत ज्यादा एनर्जी लगती है. दूसरा साल्वेज, जिसके लिए बहुत सारे न्यूक्लियोबेस सबस्ट्रेट की जरूरत होती है. स्टडी में हर पाथवे के योगदान को मापा; हाइपोक्सिक ट्यूमर ने डी नोवो सिंथेसिस को दबा दिया, जिससे प्यूरीन पूल छोटे हो गए.

शोधकर्ताओं को ऐसा लगता है कि हाइपोक्सिया ट्यूमर के बढ़ने को धीमा कर देता है, लेकिन क्या इसे मौजूदा कैंसर थेरेपी के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है? इसका जवाब है कि हाइपोक्सिया कीमोथेरेपी दवा जेमिसिटैबिन और एंटी-CTLA4 इम्यूनोथेरेपी के ट्यूमर को दबाने वाले असर को बढ़ा सकता है.

हालांकि हाइपोक्सिया वाले असली मरीजों का इलाज करना प्रैक्टिकल मुश्किलें खड़ी करेगा. हाल ही में रिसर्चर्स ने दिखाया कि हाइपोक्सीस्टैट, एक छोटा मॉलिक्यूल जो ऑक्सीजन के लिए हीमोग्लोबिन की बाइंडिंग एफिनिटी को बढ़ाता है, हाइपोक्सिया के असर की नकल कर सकता है और इस दवा ने ट्यूमर की ग्रोथ को भी धीमा कर दिया ! (All Images Credit – X @AyushDMidha)

homelifestyle

क्या ट्यूमर को बढ़ने से रोक सकता है सिस्टमेटिक हाइपोक्सिया? स्टडी में खुलासा

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *