सीएम के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ स्नेहधाम में बुजुर्गों को बेदखली नोटिस: 18 करोड़ की योजना पर राजनीतिक घमासान, क्षमता 108 की रह रहे चार बुजुर्ग – Indore News


आईडीए द्वारा बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन के लिए शुरू किया गया स्नेहधाम अब राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। जिस परियोजना का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 जून 2025 को “बुजुर्गों के लिए बड़ा सामाजिक कदम” बताया था, उसी स्नेहधाम में रह रहे चार बुजुर्गों को कॉन्ट्रैक्टर ने परिसर खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इस घटनाक्रम ने न केवल बुजुर्गों को सदमे में डाल दिया है, बल्कि सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। 28 फरवरी तक खाली करने का नोटिस आईडीए ने स्नेहधाम के संचालन की जिम्मेदारी बालाजी सेंटेला होम्स प्राइवेट लिमिटेड को दी है। कंपनी ने 70 से 90 वर्ष आयु के चार बुजुर्गों को 28 फरवरी तक परिसर खाली करने का नोटिस दिया है। अचानक मिले नोटिस से बुजुर्गों में चिंता और असुरक्षा का माहौल है। समाजसेवियों ने इसे संवेदनहीनता बताते हुए कहा कि जिन्हें सुरक्षित भविष्य का भरोसा देकर बसाया गया, उन्हें अब दर-दर भटकने पर मजबूर किया जा रहा है। कॉन्ट्रैक्टर का कहना है कि स्नेहधाम की क्षमता 108 वरिष्ठ नागरिकों की है, लेकिन फिलहाल केवल चार बुजुर्ग रह रहे हैं, जिससे संचालन आर्थिक रूप से संभव नहीं है। दूसरी ओर, आईडीए ने कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैकलिस्ट करने और अर्नेस्ट मनी जब्त करने की चेतावनी दी है। आईडीए का कहना है कि यदि मौजूदा कंपनी संचालन नहीं करती, तो किसी अन्य एनजीओ को जिम्मेदारी दी जाएगी। “एक महीने में घर खाली करना किस नीति का हिस्सा?” 9 जनवरी को समाजसेवी संजय अग्रवाल के साथ कुछ लोग स्नेहधाम पहुंचे तो बुजुर्गों की स्थिति सामने आई। यहां रह रही रिटायर्ड प्रिंसिपल अनुराधा जैन ने बताया कि रहने के लिए उनसे दो लाख रुपए सिक्योरिटी और 35 हजार रुपए मासिक शुल्क लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी लिखित एग्रीमेंट के एक महीने में घर खाली करने का नोटिस देना किस नीति का हिस्सा है। जैन ने कहा कि स्नेहधाम का प्रचार-प्रसार नहीं होने से लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। उन्होंने शुल्क कम करने और सोशल मीडिया व मीडिया के माध्यम से प्रचार की मांग की, ताकि अधिक बुजुर्ग यहां आ सकें। आठ महीने में नहीं मनाया कोई त्योहार स्नेहधाम में रह रहे बुजुर्गों ने सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि आठ महीने में कोई त्योहार नहीं मनाया गया और न ही विशेष भोजन दिया गया। उनका मानना है कि अधिक बुजुर्ग आने से सामुदायिक माहौल बनेगा और अकेलेपन की समस्या कम होगी। करोड़ों का प्रोजेक्ट बनाकर छोड़ दिया बुजुर्गों ने आरोप लगाया कि अधिक शुल्क के कारण परियोजना खाली पड़ी है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने मकान किराए पर देकर यहां शिफ्ट किया था, अब अचानक नोटिस मिलने से वे असहाय महसूस कर रहे हैं। एक वरिष्ठ नागरिक ने कहा, “75 साल की उम्र में अब लौटने के लिए मेरे पास कुछ नहीं बचा है।” 18 करोड़ की लागत, 32 फ्लैट खाली आईडीए ने स्कीम-134 में 20 हजार वर्गफीट जमीन पर 18 करोड़ रुपए की लागत से छह मंजिला स्नेहधाम बनाया है, जिसमें 32 फ्लैट और भोजन, स्वास्थ्य, बिजली, टीवी व लॉन्ड्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन महंगे शुल्क और प्रचार की कमी के कारण यहां केवल चार बुजुर्ग ही रह रहे हैं। हाईकोर्ट जाने की चेतावनी वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि महंगे शुल्क के कारण परियोजना विफल हो रही है और बुजुर्गों को बेदखली नोटिस देना अमानवीय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बुजुर्गों की सुनवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। कानून क्या कहता है Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा का अधिकार है। उम्र के आधार पर अनुचित व्यवहार या देखभाल में लापरवाही को कानूनन गलत माना जाता है। .

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