शरीर के अंदर का हाल द‍िखेगा 3D और रंगीन! वैज्ञानिकों की नई तकनीक कैंसर और डायबिटीज की जांच में साबित होगी गेम चेंजर

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अभी तक जब हम बीमार होते हैं, तो डॉक्टर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या MRI की सलाह देते हैं. लेकिन इन सबकी अपनी सीमाएं हैं. र‍िसर्चस ने अब RUSPAT (Rotational Ultrasound Tomography + Photoacoustic Tomography) नाम की एक ऐसी तकनीक बनाई है जो इन सबको पीछे छोड़ देगी.

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कैल्टेक और यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया (USC) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी मेडिकल तकनीक विकसित की है जो हमारे शरीर के अंदरूनी अंगों की 3D कलर इमेज दिखा सकेगी. साइंस डेली की र‍िपोर्ट के अनुसार इस तकनीक का नाम RUSPAT है. यह अल्ट्रासाउंड और फोटोअकौस्टिक टोमोग्राफी का एक बेजोड़ मेल है, जो न केवल अंगों की बनावट बल्कि उनमें खून के बहाव को भी साफ-साफ दिखा सकता है. इस नई तकनीक की सबसे अच्‍छी बात ये है कि इसमें न तो रेडिएशन का इस्तेमाल होता है और न ही किसी कॉन्ट्रास्ट डाई की जरूरत पड़ती है. चल‍िए समझते हैं क्‍या है ये नई तकनीक और इसके इस्‍तेमाल से कैंसर और डायबिटीज की जांच में क्‍या फायदा म‍िलेगा.

क्या है यह नई तकनीक और कैसे करेगी काम?
अभी तक जब हम बीमार होते हैं, तो डॉक्टर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या MRI की सलाह देते हैं. लेकिन इन सबकी अपनी सीमाएं हैं. जैसे एक्स-रे सिर्फ हड्डियों को देखता है और अल्ट्रासाउंड केवल कोमल अंगों यानी शरीर के सॉफ्ट टिशूज की जानकारी देता है. र‍िसर्चस ने अब RUSPAT (Rotational Ultrasound Tomography + Photoacoustic Tomography) नाम की एक ऐसी तकनीक बनाई है जो इन सबको पीछे छोड़ देगी. यह तकनीक अल्ट्रासाउंड की शक्ति को फोटोअकौस्टिक इमेजिंग के साथ जोड़ती है, जिससे शरीर के अंगों की संरचना और ब्‍लड वैसल्‍स का एक साथ 3D दृश्य मिलता है.

महंगी मशीनों और जटिल जांच से छुटकारा
भारत जैसे देश में जहाँ एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांचें काफी महंगी होती हैं और छोटे शहरों में इनकी उपलब्धता कम है, वहां RUSPAT एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है. यह तकनीक न केवल जांच को सरल बनाती है, बल्कि इसकी लागत भी मौजूदा मशीनों के मुकाबले काफी कम रहने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में 3D इमेजिंग की सुविधा आम आदमी के लिए अधिक सुलभ और सस्ती हो जाएगी.

कैंसर के खिलाफ एक मजबूत हथियार
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान में होगा. वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले मैमोग्राम अक्सर दर्दनाक और कभी-कभी कम सटीक होते हैं. RUSPAT के जरिए डॉक्टर बिना किसी चीर-फाड़ के बहुत ही बारीकी से कैंसर की गांठों और ट्यूमर तक पहुंचने वाली रक्त वाहिकाओं को देख सकेंगे. इससे कैंसर को बहुत शुरुआती स्टेज पर पकड़ना संभव होगा, जिससे इलाज की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई तकनीक कैंसर की जल्दी पहचान, नसों को हुए नुकसान की निगरानी और दिमाग से जुड़ी बीमारियों की जांच में भविष्य में बेहद मददगार साबित हो सकती है.

डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी राहत
भारत को ‘दुनिया की डायबिटीज राजधानी’ कहा जाता है. डायबिटीज के मरीजों में अक्सर पैरों की नसों में खराबी होने का डर रहता है, जिसे ‘न्यूरोपैथी’ कहते हैं. अक्सर इसका पता तब चलता है जब समस्या बहुत बढ़ जाती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि RUSPAT तकनीक नसों के नुकसान को बहुत पहले ही पहचान लेगी, जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकेगा और गंभीर स्थिति बनने जैसे पैर काटने की नौबत से बचा जा सकेगा.

भारतीय नजर‍िए से क्‍यों खास है ये तकनीक
अक्सर भारत के छोटे शहरों में मरीजों को एडवांस स्कैन के लिए बड़े शहरों की ओर भागना पड़ता है. चूंकि RUSPAT डिवाइस बनाने में कम जटिल है और इसे इस्तेमाल करना आसान है, इसलिए अगर ये तकनीक भारत आती है और छोटे शहरों तक पहुंचती हैं, तो इससे इलाज में काफी फायदे देखने को म‍िलेंगे. यह न केवल समय बचाएगा बल्कि मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी कम करेगा.

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Deepika Sharma

दीपिका शर्मा प‍िछले 5 सालों से News18 Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्‍शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र…और पढ़ें

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वैज्ञानिकों की नई तकनीक कैंसर और डायबिटीज की जांच में साबित होगी गेम चेंजर

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