बच्चों को सर्दी जुकाम के साथ है तेज बुखार, तो हो जाएं सावधान, हो सकती है यह बीमारी, जानें डॉक्टर की सलाह

मौसम में बदलाव के साथ ही छोटे बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार की समस्या तेजी से बढ़ रही है. अक्सर माता-पिता इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही सर्दी-जुकाम आगे चलकर बच्चों के कानों तक पहुंच सकता है. डॉक्टरों के अनुसार थोड़ी सी लापरवाही बच्चों में गंभीर कान की बीमारी का कारण बन सकती है, जो आगे चलकर सुनने और बोलने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है. ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता समय रहते सतर्क हो जाएं.

मौसम बदलने से बढ़ी बच्चों में कान की बीमारी

केशरी राज हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुमन्त कुमार गुप्ता बताते हैं कि इस समय मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है. इसकी वजह से बच्चों में वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ गया है. सर्दी-जुकाम के साथ अब बड़ी संख्या में बच्चे कान के संक्रमण से भी पीड़ित हो रहे हैं. इसकी मुख्य वजह यह है कि नाक और कान की पाइप (यूस्टेशियन ट्यूब) आपस में जुड़ी होती है. नाक में इंफेक्शन होने पर वही संक्रमण आसानी से कान तक पहुंच जाता है.

डॉक्टर बताते हैं कि वायरल इंफेक्शन की स्थिति में बच्चों के दोनों कान प्रभावित हो सकते हैं, जबकि बड़े लोगों में यह समस्या अक्सर एक कान तक सीमित रहती है. अगर समय पर इलाज न हो तो कान में पस भरने की स्थिति भी बन सकती है.

चिड़चिड़ापन और बुखार हैं प्रमुख लक्षण

यदि बच्चे को सर्दी-जुकाम के साथ तेज बुखार हो रहा है और वह असामान्य रूप से चिड़चिड़ा हो गया है, तो यह कान की बीमारी का संकेत हो सकता है. डॉक्टर के अनुसार कान में भारीपन, तेज दर्द और बेचैनी इसके प्रमुख लक्षण हैं. छोटे बच्चे अपनी परेशानी बता नहीं पाते, इसलिए वे बार-बार कान के पास हाथ ले जाते हैं या रोने लगते हैं.

जब कान में पस भर जाती है तो दर्द काफी बढ़ जाता है. कई बार पस बाहर निकलने पर बच्चे को थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि समस्या खत्म हो गई है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना बेहद जरूरी है.

घर पर गलत उपाय बन सकते हैं खतरा

अक्सर लोग कान दर्द होने पर घर में तेल डालने या नुकीली चीज से कान साफ करने की गलती कर बैठते हैं. डॉक्टर सुमन्त कुमार गुप्ता चेतावनी देते हैं कि ऐसा करना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है. इससे संक्रमण और बढ़ सकता है और कान की अंदरूनी संरचना को नुकसान पहुंच सकता है. यदि बच्चे को बार-बार सर्दी-जुकाम और बुखार हो रहा है तो गर्म पानी की भाप देना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन दवा या किसी भी घरेलू उपाय से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

70 प्रतिशत बच्चों में देखी जा रही समस्या

डॉक्टरों के अनुसार सामान्य तौर पर यह समस्या करीब 70 प्रतिशत बच्चों में देखी जा रही है. खासकर 5 वर्ष तक के बच्चों में यह बीमारी ज्यादा पाई जा रही है. अगर बार-बार इस बीमारी को नजरअंदाज किया जाए तो बच्चे में सुनने की क्षमता कम हो सकती है और आगे चलकर बोलने में भी दिक्कत आ सकती है.

माता-पिता के लिए जरूरी सलाह

यदि घर में छोटे बच्चे हैं और उन्हें बार-बार सर्दी-जुकाम हो रहा है, तो सतर्क हो जाएं. समय पर डॉक्टर को दिखाएं और इलाज पूरा कराएं. छोटी सी लापरवाही बच्चों को बहरा या बोलने में असमर्थ भी बना सकती है. बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का खास ध्यान रखना ही सबसे बड़ा बचाव है.

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