फरवरी बना कुत्तों के लिए खतरे का महीना! रेबीज से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

बिलासपुर: फरवरी का महीना पालतू कुत्तों के लिए बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है. मौसम में बदलाव और कमजोर इम्यूनिटी के कारण इस दौरान घातक वायरल बीमारियां तेजी से फैलती हैं. बिलासपुर के पशु चिकित्सक डॉक्टर पीके अग्निहोत्री ने कुत्ता पालकों को सतर्क करते हुए बताया कि फरवरी माह में पार्वो वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा देखने को मिलता है, जो खासकर पिल्लों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. वहीं रेबीज जैसी बीमारी न सिर्फ जानवरों बल्कि इंसानों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बनी हुई है. समय पर पहचान, तुरंत इलाज और टीकाकरण ही इन घातक बीमारियों से बचाव का सबसे कारगर उपाय है.

फरवरी में क्यों बढ़ जाता है पार्वो वायरस का खतरा
डॉक्टर पीके अग्निहोत्री के अनुसार, फरवरी में तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते कुत्तों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है. इसी दौरान कैनाइन पार्वो वायरस तेजी से फैलता है और सबसे अधिक पिल्लों को अपनी चपेट में लेता है.

पार्वो वायरस क्या है और कितना खतरनाक
पार्वो एक अत्यधिक संक्रामक और जानलेवा वायरल संक्रमण है, जो कुत्तों की आंतों और अस्थि मज्जा को प्रभावित करता है. समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी कुछ ही दिनों में पिल्ले की मौत का कारण बन सकती है.

पार्वो संक्रमण के प्रमुख लक्षण
इस बीमारी में कुत्तों को अत्यधिक उल्टी, खूनी दस्त, तेज बुखार, सुस्ती, भूख न लगना, तेजी से वजन गिरना और पेट में तेज दर्द जैसी समस्याएं होती हैं.

कैसे फैलता है पार्वो वायरस
यह वायरस संक्रमित कुत्ते के मल के संपर्क से फैलता है. मिट्टी, फर्श, कपड़े, पट्टे और अन्य वस्तुओं पर यह हफ्तों से लेकर महीनों तक जीवित रह सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है.

किन कुत्तों को होता है सबसे ज्यादा खतरा
6 सप्ताह से 6 महीने तक के पिल्ले, बिना टीकाकरण वाले कुत्ते और जर्मन शेफर्ड व रॉटवीलर जैसी नस्लों में पार्वो का खतरा अधिक रहता है.

पार्वो से बचाव और इलाज का सही तरीका
पार्वो से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण है. संक्रमित कुत्ते को अलग रखना, ब्लीच के घोल से साफ-सफाई करना और पशु चिकित्सक की निगरानी में IV फ्लूड व अन्य सहायक उपचार कराना बेहद जरूरी होता है.

रेबीज: कुत्तों के साथ इंसानों के लिए भी जानलेवा बीमारी
रेबीज एक घातक वायरस है जो संक्रमित जानवरों की लार से काटने या खरोंचने पर इंसानों में फैलता है और सीधे दिमाग व तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है. रेबीज की शुरुआत बुखार और घाव में झुनझुनी से होती है. बाद में पानी से डर, तेज उत्तेजना, भ्रम, लकवा और सांस लेने में दिक्कत जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो जाती हैं.

रेबीज से बचाव के लिए तुरंत उठाएं ये कदम
काटे गए घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से 10–15 मिनट तक धोना, 24 घंटे के भीतर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना और गंभीर घाव में इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन लेना बेहद जरूरी है.

डॉक्टर पीके अग्निहोत्री ने अपील की है कि कुत्तों में किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें, क्योंकि थोड़ी सी देरी जानलेवा साबित हो सकती है.

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