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Uric Acid Normal Range: ब्लड टेस्ट के जरिए यूरिक एसिड लेवल का पता लगाया जा सकता है. अगर जांच में यूरिक एसिड की मात्रा सामान्य से ज्यादा निकले, तो यह हाइपरयूरिसीमिया का संकेत हो सकता है. ऐसी कंडीशन में लोगों को यूरोलॉजिस्ट से मिलकर कंसल्ट करना चाहिए. यूरिक एसिड को कंट्रोल करना जरूरी है, वरना यह गंभीर समस्या पैदा कर सकता है.
यूरिक एसिड ज्यादा हो जाए, तो गाउट और किडनी स्टोन का रिस्क बढ़ता है.
Uric Acid Levels in Blood: यूरिक एसिड हमारे शरीर में बनने वाला एक वेस्ट प्रोडक्ट है, जो प्यूरिन नामक तत्व के टूटने से बनता है. प्यूरिन हमारे खाने-पीने की कई चीजों में होता है. इसकी सबसे ज्यादा मात्रा रेड मीड, सीफूड, शराब और दालों में होती है. आमतौर पर हमारी किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती हैं, लेकिन जब इसका स्तर बढ़ने लगता है तो यह कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकता है. इसलिए समय-समय पर यूरिक एसिड की जांच और उसकी नॉर्मल रेंज को समझना बहुत जरूरी है. डॉक्टर से जानते हैं कि यूरिक एसिड की जांच कैसे होती है.
नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के वाइस चेयरमैन डॉ. अमरेंद्र पाठक ने News18 को बताया कि यूरिक एसिड का पता लगाने के लिए सबसे कॉमन जांच सीरम यूरिक एसिड ब्लड टेस्ट है. यह एक साधारण खून की जांच होती है, जिसके लिए आमतौर पर खाली पेट रहना बेहतर माना जाता है. कुछ मामलों में डॉक्टर 24 घंटे का यूरिन टेस्ट कराने की सलाह भी देते हैं, जिससे यह पता चलता है कि शरीर यूरिक एसिड को कितनी मात्रा में बाहर निकाल पा रहा है. ब्लड टेस्ट से शरीर में मौजूद यूरिक एसिड का स्तर तुरंत पता चल जाता है. साल में एक बार लोगों को यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए.
क्या होती है यूरिक एसिड की नॉर्मल रेंज
डॉक्टर पाठक ने बताया कि यूरिक एसिड की नॉर्मल रेंज महिला और पुरुष के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है. पुरुषों में इसकी नॉर्मल रेंज 3.4 से 7.0 mg/dL और महिलाओं में 2.4 से 6.0 mg/dL मानी जाती है. बच्चों में यह स्तर थोड़ा कम होता है. अगर रिपोर्ट में यूरिक एसिड इस सीमा से ऊपर आता है, तो इसे हाई यूरिक एसिड यानी हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है और यह भविष्य में समस्या का संकेत हो सकता है. यही वजह है कि इसे कंट्रोल करना जरूरी होता है.
कब यूरिक एसिड बन सकता है मुसीबत
यूरोलॉजिस्ट ने बताया कि यूरिक एसिड तब मुसीबत बन जाता है, जब यह शरीर के जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है. इस स्थिति को गाउट कहा जाता है. गाउट होने पर लोगों के शरीर के छोटे जॉइंट्स में तेज दर्द, सूजन और लालिमा होती है. लंबे समय तक हाई यूरिक एसिड रहने से किडनी स्टोन, जोड़ों की समस्या और किडनी डैमेज का खतरा भी बढ़ जाता है. अगर बार-बार जोड़ों में दर्द, सूजन या पेशाब में जलन हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
यूरिक एसिड कंट्रोल करने के उपाय
एक्सपर्ट की मानें तो यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखने के लिए संतुलित आहार, भरपूर पानी पीना, नियमित व्यायाम और वजन कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है. रेड मीट, ऑर्गन मीट, अधिक दालें, बीयर और मीठे ड्रिंक्स से दूरी बनाना फायदेमंद होता है. अगर डाइट और लाइफस्टाइल से भी यह परेशान कंट्रोल न हो, तो डॉक्टर दवाएं लेने की सलाह देते हैं. सही समय पर जांच और इलाज से यूरिक एसिड से जुड़ी गंभीर परेशानियों को आसानी से रोका जा सकता है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें