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MP Gupt Kashi Mahashivratri: हर साल की तरह इस बार भी महेश्वर में दयालु मित्र मंडल के तत्वाधान में महाशिवरात्रि पर्व को शिव नवरात्रि के रूप में मनाया जाएगा. इस वर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा. पूरे परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है. जानें और क्या खास…
Khargone News: खरगोन जिले के धार्मिक नगर महेश्वर को मध्य प्रदेश की गुप्त काशी के नाम से भी जाना जाता है. यहां नर्मदा नदी किनारे ऐतिहासिक किला परिसर में स्थित प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर सदियों से आस्था का केंद्र रहा है. मंदिर की बनावट और यहां स्थापित शिवलिंग काशी की तरह ही माने जाते हैं. देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. मान्यता है कि यह शिवलिंग पहले काशी में ही स्थापित होना था, लेकिन किसी कारणवश महेश्वर में ही इसकी स्थापना कर दी गई. इसी कारण इस स्थान को गुप्त काशी कहा जाता है.
हर साल की तरह इस बार भी महेश्वर में दयालु मित्र मंडल के तत्वाधान में महाशिवरात्रि पर्व को शिव नवरात्रि के रूप में मनाया जाएगा. इस वर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा, जिसे लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां जोरों पर हैं. पूरे परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले भक्त आसानी से दर्शन कर सकें.
महाकाल की तरह मनाई जायेगी शिव नवरात्रि
महाकाल की तरह यहां भी शिव नवरात्रि के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रस्में निभाई जाएंगी. पांच दिवसीय विवाह महोत्सव की शुरुआत गणेश पूजन, मंडप एवं कलश पूजन से होगी. फिर हल्दी तथा मंगल गान एवं गंगा पूजन होगा. भगवान की वर निकासी होगी. महाशिवरात्रि के दिन भगवान का विवाह सम्पन्न होगा. रोजाना गर्भगृह में रुद्राभिषेक और विशेष श्रृंगार होगा. महाशिवरात्रि की रात 8 बजे से अगले दिन सुबह तक भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र की लगभग 20 भजन मंडलियां और गायक कलाकार भाग लेंगे.
विजेता टीम को मिलेगा पुरस्कार
संस्था के अध्यक्ष हेमंत जैन ने बताया, भजन प्रतियोगिता के लिए पहले से ऑडिशन लिए जा रहे हैं, जिसमें से बेहतर कलाकारों का चयन किया जा रहा है. प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाली टीम को 51 हजार रुपए, द्वितीय को 31 हजार और तृतीय को 21 हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा. यह आयोजन दयालु मित्र मंडल के तत्वाधान में किया जा रहा है, जो हर साल इस पर्व को भव्य रूप देता है.
मंदिर का पौराणिक इतिहास
इतिहासकारों की माने तो करीब पांचवीं-छठवीं शताब्दी में बने इस काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण राजा वामन ने करवाया था, जिसे बाद में अहिल्या बाई होलकर ने जीर्णोद्धार कराया. वे स्वयं यहां पूजा के लिए आती थीं. आज भी उनकी पालकी हर सोमवार मंदिर में लाई जाती है. मंदिर में भगवान शिव की गुप्त प्रतिमा स्थापित है, इसी वजह से महेश्वर को गुप्त काशी के नाम से जाना जाता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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