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- NSE IPO Approved: Board Clears OFS Route After SEBI NOC | Grey Market Valuation Over ₹5 Lakh Crore
मुंबई2 घंटे पहले
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज हैं।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बोर्ड ने IPO के लिए अप्रूवल दे दिया है। ये IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS होगा, जिसमें मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
बोर्ड ने IPO के लिए कमेटी का भी गठन किया है, जो पूरी लिस्टिंग प्रोसेस को देखेगी। SEBI से हाल ही में नो-ऑब्जेक्शन (NOC) मिलने के बाद ये फैसला आया है, जो भारत के कैपिटल मार्केट के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
NSE ने कहा कि IPO पूरी तहर OFS होगा। कंपनी नए शेयर जारी नहीं करेगी। लिस्टिंग NSE-BSE दोनों स्टॉक एक्सचेंज पर हो सकती है, लेकिन ये रेगुलेटरी अप्रूवल, मार्केट कंडीशंस और अन्य फैक्टर्स पर निर्भर रहेगा। NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, जहां ट्रेडिंग वॉल्यूम सबसे ज्यादा होता है।
बोर्ड ने IPO के लिए कमेटी का गठन किया
बोर्ड ने IPO कमेटी को रीकंस्टीट्यूट किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता टेबलेश पांडे करेंगे। कमेटी मेंबर्स में पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स श्रीनिवास इंजेती, प्रोफेसर ममता बिस्वाल, अभिलाषा कुमारी, प्रोफेसर सिवकुमार शामिल हैं।
साथ ही NSE के MD और CEO अशिश चौहान भी कमिटी में हैं। कमेटी बोर्ड द्वारा दिए गए कामों को करेगी, लिस्टिंग प्रक्रिया को डिफाइन करेगी और मर्चेंट बैंकर, लीगल एडवाइजर नियुक्त करने के क्राइटेरिया तय करेगी। ये कमिटी DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस) तैयार करने में मदद भी करेगी।
IPO के लिए 10 साल का इंतजार खत्म
NSE का IPO करीब एक दशक से पेंडिंग था। हाल ही में SEBI से नो-ऑब्जेक्शन मिला, जिसके बाद बोर्ड ने ये फैसला लिया। पहले भी कोशिशें हुई थीं, लेकिन रेगुलेटरी क्लियरेंस नहीं मिल पाया था। अब NSE लिस्टेड कंपनी बनेगी, जो उसके लिए नया चैप्टर होगा।
ग्रे मार्केट में NSE की वैल्यूएशन 5 लाख करोड़
एनालिस्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट में NSE की वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। NSE के करीब 1.77 लाख शेयरहोल्डर्स हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि OFS में करीब 4-4.5% शेयर बेचे जा सकते हैं, जिसकी वैल्यू लगभग 23,000 करोड़ रुपए हो सकती है। बड़े शेयरहोल्डर्स जैसे LIC, SBI और टेमासेक अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।

NSE ने पहली बार 2016 में IPO के लिए DRHP फाइल किया था।
मार्च-अप्रैल तक हो सकती है DRHP फाइलिंग
अब कमेटी प्रोसेस को आगे बढ़ाएगी। DRHP फाइलिंग मार्च-अप्रैल तक हो सकती है। पूरी प्रोसेस में 8-9 महीने लग सकते हैं। IPO के बाद NSE की ट्रांसपेरेंसी और गवर्नेंस में और सुधार आएगा। ये भारत के कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम के लिए लैंडमार्क इवेंट होगा, क्योंकि NSE इक्विटी डेरिवेटिव्स में सबसे आगे है।
NSE की लिस्टिंग से मार्केट में नई लिक्विडिटी आएगी। छोटे-बड़े निवेशक NSE में हिस्सेदारी ले सकेंगे। हालांकि फाइनल IPO साइज, प्राइस बैंड और टाइमलाइन मार्केट कंडीशंस पर निर्भर रहेगा।
NSE ने पहली बार 2016 में DRHP फाइल किया था
NSE ने पहली बार 2016 में IPO के लिए DRHP फाइल किया था, लेकिन रेगुलेटरी और लीगल मुद्दों की वजह से वापस लेना पड़ा था। उसके बाद से को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे मामलों में जांच चल रही थी, जिसने IPO को रोक रखा था।
NSE ने जून 2025 में सेबी के सामने सेटलमेंट एप्लीकेशन दाखिल की थी और करीब 1,400 करोड़ रुपए सेटलमेंट अमाउंट देने को तैयार हो गई है। नवंबर 2025 की फाइनेंशियल रिपोर्ट में NSE ने 1,297 करोड़ रुपए का प्रोविजन किया था, साथ ही पहले से 100 करोड़ रुपए जमा थे।
सेटलमेंट जल्द पूरा होने की उम्मीद
सेबी के कई डिपार्टमेंट्स ने सेटलमेंट पर इन-प्रिंसिपल सहमति दे दी है। अब यह मामला हाई पावर्ड एडवाइजरी कमिटी (HPAC) के पास जाएगा और फिर सेबी के दो व्होल टाइम मेंबर्स के पैनल से फाइनल अप्रूवल मिलेगा।
अप्रूवल के बाद सुप्रीम कोर्ट से केस वापस लिया जा सकता है। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि SAT में NSE जीत चुकी थी और सुप्रीम कोर्ट में भी SEBI को राहत नहीं मिली थी, लेकिन शेयरहोल्डर्स के दबाव में NSE ने सेटलमेंट चुना ताकि मामला बंद हो।
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दस साल की कानूनी लड़ाई के बाद देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE को IPO लाने का क्लियरेंस मिल गया है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने IPO फाइल करने के लिए NOC जारी कर दी है।
अब NSE आधिकारिक तौर पर मर्चेंट बैंकर और लॉ फर्म्स के साथ मिलकर अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार कर सकेगी। 8-9 महीने में NSE का IPO लॉन्च हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
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