When to Get a Stomach Test Done: पेट से जुड़ी समस्याएं आजकल तेजी से बढ़ रही हैं. अधिकतर लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान बिगड़ चुका है, जिसका सीधा असर पेट पर पड़ रहा है. पेट दर्द, गैस, अपच, एसिडिटी, कब्ज और बार-बार पेट भारी लगने जैसे लक्षण बड़ी संख्या में लोगों को परेशान कर रहे हैं. अक्सर लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर पेट की परेशानी लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है. समय पर सही जांच कराना न सिर्फ बीमारी की असली वजह बताता है, बल्कि गंभीर समस्याओं से भी बचा सकता है. अब सवाल है कि पेट की समस्या हो, तो कौन सा टेस्ट कराना चाहिए? चलिए इस बारे में डॉक्टर से जान लेते हैं.
नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि पेट से जुड़ी किसी भी समस्या में सबसे पहले लक्षण देखे जाते हैं और उसके आधार पर ही टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है. अगर बार-बार गैस, एसिडिटी या सीने में जलन हो रही है, तो मरीजों को एंडोस्कोपी कराने की सलाह दी जाती है. इस जांच में एक पतली नली के जरिए पेट के अंदर की सतह को देखा जाता है, जिससे अल्सर, सूजन या इंफेक्शन जैसी समस्याओं का पता चलता है.
डॉक्टर के मुताबिक अगर मरीज को लंबे समय से दस्त, कब्ज, मल के साथ खून आना या अचानक वजन कम होने जैसी शिकायत है, तो ऐसे मामलों में कोलोनोस्कोपी कराई जाती है. यह जांच बड़ी आंत यानी कोलन से जुड़ी बीमारियों जैसे इंफ्लेमेशन, पॉलीप्स या कैंसर की पहचान में मदद करती है. 40 साल के बाद या फैमिली हिस्ट्री होने पर यह जांच और भी जरूरी हो जाती है. कई बार पेट दर्द, उल्टी, बुखार या इंफेक्शन के लक्षणों में ब्लड टेस्ट और स्टूल टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है. ब्लड टेस्ट से इंफेक्शन, एनीमिया या लिवर से जुड़ी दिक्कतों का संकेत मिलता है, जबकि स्टूल टेस्ट से पेट के कीड़े, बैक्टीरियल इंफेक्शन या आंतों से खून जाने की समस्या का पता लगाया जा सकता है. ये टेस्ट पेट की शुरुआती समस्याओं को पहचानने में काफी अहम होते हैं.
डॉक्टर अरोड़ा ने बताया कि अगर पेट दर्द के साथ सूजन, गांठ या लिवर, पित्ताशय और अग्न्याशय से जुड़ी परेशानी का शक हो, तो डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन की सलाह देते हैं. अल्ट्रासाउंड एक आसान और सुरक्षित जांच है, जिससे पेट के अंदरूनी अंगों की स्थिति देखी जाती है. वहीं सीटी स्कैन ज्यादा विस्तृत जानकारी देता है और जटिल मामलों में उपयोगी होता है. पेट की किसी भी समस्या में खुद से टेस्ट कराने या दवाइयां लेने के बजाय पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. हर मरीज के लक्षण अलग होते हैं, इसलिए सभी के लिए एक ही टेस्ट सही नहीं होता. समय पर सही जांच और इलाज न सिर्फ दर्द से राहत दिलाता है, बल्कि गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में डिटेक्ट किया जा सकता है.