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Health Tips: डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 को बताया कि भूमि आंवला बाग-बगीचों, खेतों, सड़कों के किनारे और गीली मिट्टी वाले क्षेत्रों में खुद उग आता है. औषधीय दृष्टि से भूमि आंवला खासतौर पर लिवर और पीलिया से संबंधित रोगों में बहुत लाभकारी माना जाता है.
सीधी. मध्य प्रदेश का विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक रूप से औषधीय जड़ी-बूटियों का समृद्ध भंडार माना जाता है. यहां पाई जाने वाली कई दुर्लभ वनस्पतियों का उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है. इन्हीं औषधीय पौधों में भूमि आंवला का विशेष स्थान है, जिसे भू-आमलकी भी कहा जाता है. देखने में सामान्य लगने वाला यह छोटा सा पौधा अनेक गंभीर रोगों के उपचार में बेहद प्रभावी माना जाता है. सीधी के आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि भूमि आंवला एक छोटा लेकिन अत्यंत गुणकारी औषधीय पौधा है. यह जमीन के बेहद करीब उगता है, इसी कारण इसे भूमि आंवला कहा जाता है. इसकी ऊंचाई लगभग 5 से 15 सेंटीमीटर तक होती है. पौधा हरे रंग का होता है, इसकी पत्तियां कोमल होती हैं और पत्तियों के बीच मटर के दाने के आकार जैसे छोटे-छोटे फल नीचे की ओर दिखाई देते हैं.
डॉ विपिन सिंह के अनुसार, भूमि आंवला पूरे भारत में सहज रूप से पाया जाता है. यह खेतों, बाग-बगीचों, सड़कों के किनारे और गीली मिट्टी वाले क्षेत्रों में स्वतः उग आता है. बरसात के मौसम में इसका फैलाव और भी अधिक देखने को मिलता है. औषधीय दृष्टि से भूमि आंवला विशेष रूप से लिवर और पीलिया से संबंधित रोगों में अत्यंत लाभकारी माना जाता है. इसके सेवन से यकृत की कार्यक्षमता में सुधार होता है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते हैं.
आयुर्वेद में प्रभावी ब्लड प्यूरिफायर
डॉ विपिन सिंह ने बताया कि भूमि आंवला को आयुर्वेद में एक प्रभावी ब्लड प्यूरिफायर माना गया है. यह पथरी, मूत्र विकार, कब्ज, अपच जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में भी उपयोगी है. इसके नियमित सेवन से त्वचा रोगों में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं. आयुर्वेद में भूमि आंवला के पूरे पौधे का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है. डॉ सिंह के अनुसार, भूमि आंवला का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम खाली पेट लेने से अच्छे परिणाम मिलते हैं. इसका काढ़ा 40 से 50 मिलीलीटर तक लिया जा सकता है. इसके अलावा इसका चूर्ण भी उपयोगी है, जिसे 3 से 5 ग्राम सुबह-शाम गर्म पानी या शहद के साथ लिया जाता है.
गठिया रोग में मिलेगी राहत
उन्होंने यह भी बताया कि भूमि आंवला का नियमित सेवन गठिया रोग में राहत दिलाने में सहायक होता है. इसमें कफ संतुलन करने वाले गुण मौजूद होते हैं, जिससे खांसी, अस्थमा और सांस की समस्याओं में लाभ मिलता है. साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और हैपेटोप्रोटेक्टिव गुण लिवर को मजबूत बनाते हैं और पीलिया जैसी बीमारियों में इसे बेहद प्रभावी औषधि बनाते हैं. यह कहा जा सकता है कि यह पौधा पीलिया का पक्का दुश्मन है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.