क्या अंग्रेजी दवा लेने के बाद शरीर उस पर डिपेंड हो जाता है? आखिर क्या है हकीकत, डॉक्टर से जान लीजिए

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Medicine Dependency Myth: अक्सर लोगों को लगता है कि अंग्रेजी यानी एलोपैथिक दवाएं लेने से शरीर उन पर निर्भर हो जाता है, लेकिन डॉक्टर इसे सिर्फ गलतफहमी बताते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार अधिकतर एलोपैथी दवाएं लेने से एडिक्शन का कोई खतरा नहीं होता है. कुछ विशेष दवाओं में सावधानी जरूरी होती है, लेकिन डॉक्टर की सलाह से ली गई दवाएं सुरक्षित होती हैं. आजकल सोशल मीडिया पर लोग एलोपैथी के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं. लोगों को इनसे सावधान रहना चाहिए.

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एलोपैथी की अधिकतर दवाओं से एडिक्शन का रिस्क नहीं होता है.

Truth About Allopathic Drugs: अधिकतर लोग तबीयत खराब होने पर ओवर द काउंटर मिलने वाली एलोपैथिक दवाएं खरीदकर खा लेते हैं. कई बार इससे आराम मिल जाता है, जबकि कुछ लोगों को डॉक्टर के पास जाना पड़ता है. सिरदर्द, बुखार, सर्दी-खांसी या गैस जैसी छोटी समस्याओं में लोग बिना सोचे-समझे अंग्रेजी दवाइयों का सहारा ले लेते हैं. हालांकि कई लोगों के मन में एक डर जरूर रहता है कि कहीं इन दवाओं को लेने से शरीर इनका आदी तो नहीं हो जाएगा. कई लोग मानते हैं कि एक बार एलोपैथिक दवा शुरू कर दी, तो फिर जीवनभर उसी पर निर्भर रहना पड़ता है. इस बात में कितनी सच्चाई है?

यूपी के लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि एलोपैथी दवाएं एविडेंस बेस्ड होती हैं और कई ट्रायल्स के बाद इन्हें इस्तेमाल करने के लिए अप्रूवल मिलता है. अधिकतर अंग्रेजी दवाएं शरीर को डिपेंडेंट नहीं बनाती हैं. लोगों को निर्भरता और इलाज के बीच फर्क समझना जरूरी है. सामान्य पेनकिलर, एंटीबायोटिक या बुखार की दवा सही डोज में लेने से एडिक्शन नहीं होता है. ये दवाएं बीमारी को कंट्रोल करने या लक्षणों को ठीक करने के लिए होती हैं. इनसे शरीर को किसी तरह की लत नहीं लगती है. सोशल मीडिया पर तमाम इंफ्लुएंसर्स एलोपैथिक दवाओं का दुष्प्रचार कर रहे हैं. लोगों को इन बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए और गलतफहमी से बचना चाहिए.

डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि कुछ एलोपैथिक दवाएं ऐसी होती हैं, जिनसे शरीर को इनकी आदत लग सकती है. इसमें नींद की गोलियां, एंटी-एंजायटी ड्रग्स, ओपिओइड्स और स्टेरॉयड शामिल हैं. हालांकि इन दवाओं का लंबे समय या बिना मेडिकल निगरानी के सेवन करने से शरीर को एडिक्शन हो सकता है. हालांकि डायबिटीज, बीपी, बुखार, इंफेक्शन या अन्य दवाएं लेने से एडिक्शन या डिपेंडेंसी का कोई खतरा नहीं होता है. डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, थायरॉइड या अस्थमा में लंबे समय तक दवा लेने की जरूरत होती है, जिसे लोग अक्सर गलत तरीके से डिपेंडेंसी समझ लेते हैं. यह निर्भरता नहीं, बल्कि बीमारी की जरूरत होती है. अगर आप दवा नहीं लेंगे, तो बीमारी अनकंट्रोल होने लगेगी. यह डिपेंडेंसी नहीं, बल्कि ट्रीटमेंट होता है.

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एक्सपर्ट की मानें तो दवाओं से लोगों को खतरा तब होता है, जब वे खुद से दवाएं शुरू कर देते हैं या समय से पहले बंद कर देते हैं. एंटीबायोटिक का अधूरा कोर्स, बार-बार पेनकिलर लेना या बिना सलाह नींद की गोलियां खाना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे दवा का असर कम होने लगता है और भविष्य में वही दवा काम नहीं करती, जिसे लोग गलत तरीके से डिपेंडेंसी समझ लेते हैं. एक्सपर्ट की सलाह है कि किसी भी दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के न लें और सही डोज व सही टाइम तक लें. अगर किसी दवा से साइड इफेक्ट या आदत लगने की आशंका हो, तो डॉक्टर खुद उसका विकल्प या डोज कम कर देते हैं. सही तरीके से ली गई अंग्रेजी दवाएं जान बचाती हैं, न कि शरीर को कमजोर बनाती हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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