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How Light Controls Your Sleep: जब अंधेरा होता है, तब हमें अच्छी नींद आती है. इसकी वजह लाइट और नींद का अनोखा कनेक्शन है. लाइट हमारी नींद को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती है. गलत समय पर तेज या नीली लाइट मिलने से हमारे शरीर की नेचुरल क्लॉक गड़बड़ हो जाती है, जिसकी वजह से नींद टूट जाती है. जबकि अंधेरा होने पर गहरी नींद आती है.
Darkness and Sleep Quality: हमारी नींद और लाइट का सीधा कनेक्शन होता है. रात में जब अंधेरा होता है, तब लोगों को नींद आने लगती है. सुबह रोशनी होते ही नींद खुल जाती है. यह एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है, जो शरीर में होती है. हालांकि डिजिटल युग में आर्टिफिशियल लाइट का एक्सपोजर बढ़ गया है, जिससे लोगों की नींद खराब होने लगी है. अधिकतर लोग जानते हैं कि अंधेरे में नींद अच्छी आती है और लाइट जलते ही लोगों की नींद खुल जाती है. लोग इसे नॉर्मल बात मानते हैं, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक वजह है. दरअसल लाइट सीधे हमारे शरीर की इंटरनल बायोलॉजिकल क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम को कंट्रोल करती है. इससे नींद का सिस्टम गड़बड़ हो जाता है.
आजकल 24 घंटे मौजूद आर्टिफिशियल लाइट जैसे स्ट्रीटलाइट, ऑफिस लाइट और मोबाइल-लैपटॉप की स्क्रीन बायोलॉजिकल क्लॉक को कंफ्यूज कर देती है. गलत समय पर ज्यादा रोशनी मिलने से सर्केडियन रिदम बिगड़ सकती है, जिससे नींद देर से आती है, बार-बार टूटती है और शरीर पूरी तरह आराम नहीं कर पाता है. रिसर्च बताती हैं कि लंबे समय तक ऐसा होने से मेटाबॉलिज्म गड़बड़ हो सकता है, वजन बढ़ सकता है, दिल की बीमारियों और मानसिक समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. इस लाइट का असर मेलाटोनिन हार्मोन पर भी पड़ता है, जिसे नींद का हार्मोन कहा जाता है. अंधेरा होते ही दिमाग की पीनियल ग्रंथि मेलाटोनिन बनाना शुरू करती है, जिससे नींद आना शुरू हो जाती है. जबकि लाइट और खासकर ब्लू लाइट मेलाटोनिन के निर्माण को धीमा या पूरी तरह रोक देती है. इससे नींद आने में दिक्कत होती है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक बेहतर नींद के लिए यह जरूरी है कि सोने से पहले रोशनी को कम किया जाए. खासतौर पर ब्लू लाइट देने वाली स्क्रीन जैसे- स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट से दूरी बनाएं, बेडरूम में हल्की पीली या लाल रोशनी का इस्तेमाल करें और कमरे को जितना हो सके अंधेरा रखें. सही रोशनी का चुनाव न सिर्फ नींद की क्वालिटी सुधारता है, बल्कि शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. अगर आपको अंधेरे में भी नींद नहीं आती है, तो इस बारे में डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करें. कई बार नींद न आना सेहत से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें