पैरों में गर्मी, झनझनाहट या ठंड का एहसास ना होना…अगर आपको भी रहा है ऐसा कुछ तो फौरन भागे अस्पताल वरना हो जाएगा काफी देर

कभी-कभी छोटी-सी लापरवाही बड़ी बीमारी का रूप धारण कर लेती है. कई बार अचानक किसी गंभीर बीमारी का पता चलता है, जो बड़ी मुसीबत बन जाती है. ऐसा ही मामला मऊ जनपद में सामने आ रहा है, जहाँ लोगों के हाथ-पैर सुन्न होने लगे हैं. जांच के बाद एक अलग ही बीमारी का खुलासा हुआ है. आइए जानते हैं कि वह बीमारी कौन-सी है और कितनी खतरनाक है.

शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है टीबी

लोकल 18 से बातचीत में प्रेमा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ. अम्मान अली बताते हैं कि उनके अस्पताल में एक अलग तरह की बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं. कुछ मरीजों में ऐसे लक्षण दिखाई दिए, जो पहले कमजोरी के रूप में शुरू हुए और धीरे-धीरे गंभीर बीमारी में बदल गए. शुरुआती लक्षणों में मरीजों के दोनों पैर सुन्न हो गए थे और वे काम नहीं कर रहे थे. पैरों में गर्मी, झनझनाहट या ठंड का एहसास भी नहीं हो रहा था. जांच के दौरान पता चला कि मरीज को टीबी की बीमारी हो गई थी, जिसके कारण नसें प्रभावित हो रही थीं.

हड्डी गलने के कारण शरीर के अंग नहीं कर रहे थे काम

डॉ. अम्मान अली ने बताया कि टीबी एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है. इस मामले में मरीज को रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) में टीबी हो गई थी. L1–L2 लेवल पर हड्डी गल चुकी थी और वहां पस (Pus) भर गया था. पस की मात्रा इतनी अधिक थी कि नसों पर दबाव पड़ रहा था, जिसके कारण मरीज के शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर रहे थे.

उन्होंने बताया कि यदि नसों में किसी भी प्रकार की समस्या महसूस हो, तो तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से जांच कराकर इलाज शुरू कर देना चाहिए. शुरुआती लापरवाही आगे चलकर गंभीर समस्या पैदा कर सकती है और शरीर के अंगों की कार्यक्षमता पूरी तरह खत्म हो सकती है.

सफल इलाज से एक सप्ताह में मरीज के अंगों ने करना शुरू किया काम

अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज महेंद्र बताते हैं कि करीब एक सप्ताह से उनके हाथ-पैर हिलना-डुलना बंद हो गए थे. उन्होंने कई जगह इलाज कराया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला. बाद में उन्हें प्रेमा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के बारे में जानकारी मिली, जहां भर्ती होने के बाद एक सप्ताह में ही उनके शरीर ने काम करना शुरू कर दिया.

महेंद्र का कहना है कि यह उनकी छोटी-सी लापरवाही का ही नतीजा था कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, लेकिन यहां के चिकित्सकों द्वारा किए गए बेहतर इलाज की वजह से अब उनके पैर और कमर फिर से काम करने लगे हैं.

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