आप 70 साल जिएंगे या 100 साल, इस बात पर करता है डिपेंड, लाइफस्टाइल और डाइट सब बेकार की बातें?

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Genes Play Bigger Role in Longevity: इंसान की उम्र तय करने में उनके जीन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यह बात एक नई रिसर्च में सामने आई है. वैज्ञानिकों की मानें तो अधिकतर लोगों की करीब 55 प्रतिशत उम्र जेनेटिक होती है, जबकि बाकी हिस्सा लाइफस्टाइल और पर्यावरण पर निर्भर करता है. इस रिसर्च की बातें जानकर आपका दिमाग घूम जाएगा.

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इंसान की उम्र में उसके जीन्स का अहम योगदान होता है.

Genes Set Your Lifespan Limit: अक्सर कहा जाता है कि लंबी उम्र जीने के लिए लोगों को अच्छी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए, बैलेंस्ड डाइट का सेवन करना चाहिए और रोज एक्सरसाइज करनी चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि अच्छे खानपान और सही आदतों से इंसान की उम्र बढ़ सकती है. हालांकि एक नई रिसर्च में हैरान करने वाली बात सामने आई है. इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लोगों की उम्र उनके जीन (Genes) तय करते हैं. आप 70 साल जिएंगे, 100 साल जिएंगे या इससे भी ज्यादा जिंदा रहेंगे, इसमें आपकी जेनेटिक बनावट की भूमिका कहीं ज्यादा अहम हो सकती है. चाहें आपकी लाइफस्टाइल कितनी भी अच्छी क्यों न हो, लेकिन आपकी उम्र में सबसे बड़ा फैक्टर जीन का ही रहेगा.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक Science जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में दावा किया गया है कि अगर रोड एक्सीडेंट, इंफेक्शन और अन्य बाहरी कारणों से होने वाली मौतों को अलग कर दिया जाए, तो इंसानी उम्र का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा जेनेटिक होता है. आसान भाषा में समझें तो किसी आबादी में लोगों की उम्र में जो अंतर दिखाई देता है, उसका आधे से ज्यादा कारण जीन होते हैं. यह आंकड़ा पहले के अनुमानों से कहीं ज्यादा है, जिनमें जेनेटिक्स की भूमिका सिर्फ 10 से 25 प्रतिशत मानी जाती थी. यह स्टडी डेनमार्क और स्वीडन के बड़े स्कैंडिनेवियन ट्विन डाटा पर आधारित है, जिसमें 100 साल से ज्यादा की जानकारी शामिल है.

वैज्ञानिकों ने एक जैसे जीन वाले (आइडेंटिकल) और अलग जीन वाले (नॉन-आइडेंटिकल) जुड़वां बच्चों का अध्ययन किया, जिन्हें साथ और अलग-अलग माहौल में पाला गया था. इसके अलावा अमेरिका के 100 साल से ज्यादा उम्र के भाई-बहनों के आंकड़े भी शामिल किए गए. ज्यादातर प्रतिभागी 1870 से 1935 के बीच जन्मे थे, जब संक्रामक बीमारियों और हादसों से मौतें कॉमन थीं. रिसर्च में पाया गया कि जब इन बाहरी कारणों से हुई मौतों को हटाया गया, तो आइडेंटिकल ट्विन्स की उम्र में समानता कहीं ज्यादा मजबूत नजर आई. इससे साफ हुआ कि पहले के अध्ययनों में जेनेटिक्स का असर इसलिए कम दिखा, क्योंकि बाहरी कारणों ने असली तस्वीर को ढक दिया था. जैसे-जैसे आधुनिक चिकित्सा और बेहतर जीवन स्थितियों के कारण संक्रमण और हिंसा से मौतें कम हुईं, वैसे-वैसे जीन का असर ज्यादा साफ नजर आने लगा.

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भारतीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस स्टडी के नतीजे पब्लिक हेल्थ के लिहाज से बेहद अहम हैं. फोर्टिस C-DOC के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा के अनुसार बायोलॉजिकल उम्र बढ़ने में जीन की बड़ी भूमिका होती है, लेकिन भारत में हालात इस फायदे को कम कर सकते हैं. उनका कहना है कि खराब पोषण, बढ़ता वायु प्रदूषण, डायबिटीज और मोटापा जेनेटिक बढ़त को खत्म कर सकते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं.

एक्सपर्ट्स की मानें तो लंबी उम्र जीन और पर्यावरण के संतुलन का नतीजा होती है. जीन इंसान की उम्र की एक ऊपरी सीमा तय करते हैं, जबकि लाइफस्टाइल और एपिजेनेटिक्स यह तय करते हैं कि कोई व्यक्ति उस सीमा के कितने करीब पहुंच पाता है. वैज्ञानिक भी साफ करते हैं कि यह स्टडी यह नहीं कहती कि इंसान की उम्र जन्म के समय तय हो जाती है, बल्कि जीन उम्र तय करते हैं और जीवनशैली यह तय करती है कि हम वहां तक पहुंच पाएंगे या नहीं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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