दिल्ली. कोरोना लॉकडाउन का समय कई लोगों के लिए मुश्किलों भरा रहा, लेकिन इसी दौर ने कई महिलाओं को अपने हुनर को पहचानने का मौका भी दिया. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है दीपिका खुशवाहा की, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपने शौक को एक सफल बिजनेस में बदल दिया. दीपिका पहले से पेंटिंग और फूलों को सुरक्षित रखने यानी फ्लावर प्रिजर्वेशन का काम करती थी.
लॉकडाउन के दौरान दीपिका ने सोचा कि क्यों न फूलों को सिर्फ सहेजने के बजाय उन्हें कुछ नया रूप दिया जाए. यहीं से फूलों से बनी ज्वेलरी का आइडिया सामने आया. उन्होंने अपने पहले कुछ डिजाइन इंस्टाग्राम पर डाले और उम्मीद से कहीं ज्यादा अच्छा रिस्पॉन्स मिला. सिर्फ 2-3 प्रोडक्ट्स पोस्ट करने के बाद ही वे सोल्ड आउट हो गए.
एक महीने की मेहनत से बनती है ज्वेलरी
Bodhisattva की ज्वेलरी कोई आम ज्वेलरी नहीं है. इसके लिए फूल अलग-अलग राज्यों से इकट्ठा किए जाते हैं. इन्हें सुरक्षित रखने की प्रक्रिया करीब एक महीने तक चलती है. इसके बाद इन फूलों को बेहद बारीकी से ज्वेलरी में बदला जाता है. यहां पेंडेंट, इयररिंग्स, ब्रैसलेट्स, रिंग्स और ग्राहक की मांग के अनुसार कस्टम ज्वेलरी भी तैयार की जाती है.
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
यह स्टार्ट-अप सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल है. दीपिका की टीम में 5 महिलाएं काम कर रही हैं, साथ ही 2 सहायक स्टूडियो में रहते हैं. सूरजकुंड मेले के दौरान टीम का एक हिस्सा वहां काम करने चला जाता है. यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है.
दिल्ली-एनसीआर से देशभर तक पहचान
Bodhisattva एक दिल्ली बेस्ड कंपनी है. इसका स्टूडियो गुरुग्राम सेक्टर-23 में स्थित है. दीपिका और उनकी टीम दिल्ली में सरकारी बैठकों और आयोजनों में भी हिस्सा लेती हैं. आज यह ब्रांड इंस्टाग्राम, गूगल और अमेज़न जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है, हालांकि इंस्टाग्राम के जरिए जुड़ना ग्राहकों के लिए ज्यादा आसान और किफायती है.
मुनाफे से ज्यादा आत्मनिर्भरता
दीपिका मुनाफे के आंकड़े बताने से बचती हैं, लेकिन वह बताती हैं कि स्टॉल और अन्य खर्चों के बाद करीब 30 प्रतिशत की बचत हो जाती है. उनके लिए यह बचत सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की पहचान है.
नई महिलाओं के लिए प्रेरणा
दीपिका खुशवाहा की यह कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने हुनर को पहचान कर कुछ नया शुरू करना चाहती हैं. यह साबित करती है कि सही सोच, मेहनत और आत्मविश्वास हो, तो छोटे कदम भी बड़ी सफलता की ओर ले जा सकते हैं.
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